विनियामकों के बीच विवादों के निपटारे के लिए विधेयक पारित

नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा ने विनियामकों के बीच वित्तीय विवादों के निपटारे के लिए एक समिति गठित करने हेतु सोमवार को एक विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी।

लोकसभा ने इस विधेयक को तब मंजूरी दी, जब वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सदन को आश्वस्त किया कि यह विधेयक कोई सुपर विनियामक नहीं होगा, और न विनियामकों की स्वायत्तता को कम करेगा।

इस विधेयक पर चर्चा के दौरान मुखर्जी ने कहा, "यह सच है कि इस बात को लेकर कई चिंताएं हैं कि कहीं हम विनियामकों की स्वायत्ता को कम तो नहीं करने जा रहे हैं। मेरा इस तरह का कोई इरादा नहीं है। मैं गतिविधि को सीमित कर रहा हूं। यह सिर्फ अधिकार क्षेत्र के मुद्दों में होगा, अन्य मामलों में नहीं।"

पिछले महीने युनिट लिंक्ड बीमा योजनाओं (यूलिप्स) को लेकर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के बीच हुई रस्साकशी के बाद पिछले महीने जारी एक अध्यादेश की जगह अब प्रतिभूति एवं बीमा कानून (संशोधन एवं मान्यकरण) विधेयक -2010 ले लेगा।

मुखर्जी ने कहा, "यह कोई सुपर विनियामक संस्था नहीं है। इसे संसद बना रही है।" उन्होंने कहा कि सरकार केवल गतिरोध दूर करने के लिए हस्तक्षेप करेगी।

यह विधेयक वित्तीय विनियामकों-सेबी, इरडा, आरबीआई और पीएफआरडीए के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए वित्त मंत्री के नेतृत्व में एक संयुक्त तंत्र मुहैया कराता है।

मुखर्जी ने कहा कि मध्यस्थता के पहले चरण में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति होगी।

मुखर्जी ने कहा, "यदि दो विनियामक एक ही उत्पाद पर अपने अधिकार क्षेत्र का दावा करते हैं और यदि इसे सुलझा नहीं पाते हैं, तो यह मामला स्वत: संयुक्त तंत्र के पास नहीं आएगा। मैंने अपने इरादे को सार्वजनिक रूप से जाहिर किया है और मैंने संस्थानिक संशोधन भी किया है।"

यदि दो पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाते हैं तो अध्यादेश के संशोधन के अनुसार उनमें से कोई संयुक्त तंत्र से संपर्क कर सकता है, जिसका अध्यक्ष वित्त मंत्री होगा और उपाध्यक्ष आरबीआई का गवर्नर।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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