नेपाल में अब प्रधानमंत्री पद का चुनाव गुरुवार को (लीड-1)
काठमांडू, 2 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल में सत्ता के लिए लंबे समय से जारी अभूतपूर्व संघर्ष के बीच सोमवार को प्रधानमंत्री पद के चुनाव के तीसरे दौर में भी अनिश्चितता व्याप्त रहने के कारण सभी प्रमुख राजनीतिक दल गुरुवार को चौथे दौर का चुनाव कराने पर राजी हो गए हैं।
माधव कुमार नेपाल के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे के एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उनके उत्तराधिकारी का चयन न हो पाने का संकेत मिलते ही सदन के अध्यक्ष सुभाष नेम्बांग ने चुनाव के चौथे दौर की नई तारीख तय करने के लिए तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों-माओवादियों, नेपाली कांग्रेस (एनसी) और कम्युनिस्टों के मुख्य सचेतकों की बैठक बुलाई।
सोमवार को सांसद, जैसे ही माओवादियों के प्रमुख एवं नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड और एनसी नेता राम चंद्र पौडेल में से किसी एक को अपने पसंदीदा उम्मीदवार के रूप में चुनने के लिए मतदान को तैयार हुए, तभी कम्युनिस्टों और करीब 10 दलों ने मतदान न करने का ऐलान कर दिया। जिससे एक और विफलता के आसार दिखने लगे।
सोमवार के चुनाव से पूर्व तराई की चारों राजनीतिक पार्टियों के ब्लॉक और माओवादियों में कोई सहमति न बन पाई और इसके बाद उन्होंने माओवादियों को समर्थन देने के मसले पर विचार के लिए अपने गठबंधन सहयोगियों की बैठक शुरू कर दी।
नेपाल की संसद में माओवादियों की पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है और प्रचंड को साधारण बहुमत हासिल करने के लिए महज 70 मतों की जरूरत है।
माओवादियों ने दो वर्ष पूर्व हुए चुनाव में 237 सीटें जीती थी और नेपाल के इतिहास में पहली बार माओवादी सत्ता पर काबिज हुए थे। सोमवार के चुनाव के लिए एक छोटी कम्युनिस्ट पार्टी, नेपाल वर्कर्स एंड पीजेंट्स पार्टी ने माओवादियों को समर्थन देने का आश्वासन दिया था। इस पार्टी के पास पांच सांसद हैं।
किसी समय नेपाल की सबसे बड़ी पार्टी रही एनसी, 2008 के चुनाव में मात्र 114 सीटें हासिल कर पाई थी, लिहाजा सरकार बनाने के लिए उसे कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।
नेपाल के एक टेबलायड अखबार ने सोमवार को राजनीतिक पार्टियों की जमकर खिंचाई की है। अखबार ने पार्टियों को चेतावनी दी है कि नेपाली संसद और प्रधानमंत्री का चुनाव नेपाली जनता और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरों में एक मजाक बन गया है।
समाचार पत्र 'नया पत्रिका' ने प्रथम पृष्ठ पर अपनी संपादकीय में लिखा है, "यदि संसद इस देश को एक प्रधानमंत्री भी नहीं दे सकती, तो सभी सांसदों (599) को बेकार घोषित कर दिया जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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