शाह की हिरासत पर फैसला 4 अगस्त को (लीड-1)
सीबीआई की तरफ से के.टी.एस. तुलसी और शाह की तरफ से राम जेठमलानी की दलीलों को सुनने के बाद विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश ए. आई. रावल जांच एजेंसी की याचिका पर अपने फैसले को बुधवार तक के लिए सुरक्षित रखा है।
शाह की हिरासत की मांग करते हुए तुलसी ने कहा कि सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले के दो गवाहों की पहले ही मौत हो चुकी है और इसमें शाह की संलिप्तता की बात सामने आई है।
उन्होंने कहा कि सीबीआई का मानना था कि एक पूर्व गृह राज्य मंत्री के रूप में न्यायिक हिरासत में सवालों का जवाब देकर शाह जांच में सहयोग करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
तुलसी ने कहा, "वह फिरौती वसूलने वाले गिरोह में प्रमुख अभियुक्त हैं। प्रथम दृष्टया इसमें राज्य सरकार के कर्मियों, पुलिस अधिकारियों और अन्य अपराधियों की संलिप्तता की बात सामने आई है।"
उन्होंने कहा, "चार लोगों ने सीबीआई के सामने गवाही दी है कि उन्हें समाज विरोधी क्रियाकलाप अधिनियम की रोकथाम (पीएएसए) के तहत कैद और फिरौती के लिए धमकी दी गई।"
तुलसी ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीआई इस मामले की सुनवाई को राज्य से बाहर ले जाने की मांग नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, "हम सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई चाहते हैं।"
वहीं जेठमलानी ने कहा कि उनके मुवक्किल को चार्जशीट की प्रति नहीं दी गई जबकि यह मीडिया के लिए उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि शाह से पूछताछ के लिए सीबीआई को तीन दिन दिए गए थे लेकिन वह इसका ठीक से उपयोग नहीं कर सकी और अब अतिरिक्त समय की मांग कर रही है।
सीबीआई ने 23 जुलाई को इस मुठभेड़ के मामले में 30,000 पृष्ठों का आरोप पत्र दायर किया था।
सीबीआई ने शाह को सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में हत्या, अपहरण और आपराधिक साजिश रचने का आरोपी बनाया है। 25 जुलाई को शाह ने समर्पण कर दिया था जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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