स्थिति सामान्य होने पर ही राजनीतिक या प्रशासनिक कदम : अब्दुल्ला

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य केंद्रीय नेताओं से मुलाकात के बाद अब्दुल्ला ने संवाददताओं से बातचीत में कहा, "बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि राज्य में किसी भी तरह के राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाए जाने से पहले सामान्य स्थिति कायम करना जरूरी है।"

प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा शामिल थे।

उमर ने कहा, "हिंसा के दौरे में हमने अपनों को खोया है। प्रदर्शनकारी एक घटना के बाद प्रदर्शन करते हैं और हिंसा में एक और व्यक्ति की मौत हो जाती है। हिंसा के इस दौर को निश्चित तौर पर रोकना होगा।"

अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर की समस्या एक राजनीतिक समस्या है और इसका समाधान भी राजनीतिक तरीके से करने की जरूरत है। उन्होंने सैन्य बलों को विशेषाधिकार देने संबंधी कानून को हटाने और सीमावर्ती इलाकों से युवाओं की वापस बुलाने जैसे कदम उठाए जाने की जरूरत पर बल दिया।

उन्होंने घाटी के प्रदर्शनकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानमंत्री के साथ करीब दो घंटे तक चर्चा के दौरान अब्दुल्ला ने राज्य में हिंसा पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वह घाटी में शांति स्थापित करें लेकिन पर्याप्त सुरक्षा बलों के अभाव में वह कुछ नहीं कर सकते।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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