पारिस्थितिकी के लिए वरदान हो सकती है रोहतांग सुरंग

मनाली (हिमाचल प्रदेश), 2 अगस्त (आईएएनएस)। रोहतांग सुरंग पिरयोजना के तहत 8.8 किलोमीटर लंबी सुरंग के बन जाने के बाद रोहतांग दर्रे के पारिस्थितिकी तंत्र को वाहनों की आवाजाही की वजह से होने वाले प्रदूषण से कुछ राहत मिल सकती है।

करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सुरंग का निर्माण कार्य गत 28 जून से शुरु हो गया था। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रोहतांग सुरंग की आधारशिला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रखी थी। सुरंग का निर्माण वर्ष 2015 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।

सुरंग के बन जाने के बाद मनाली से लेह के बीच की 48 किलोमीटर दूरी कम होगी और यात्रा में लगने वाले समय में लभगभ चार घंटे की बचत होगी।

कुल्लू के जी.बी.पंत हिमालयी पर्यावरण एवं विकास संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक के.सी.कुनियाल ने आईएएनएस को बताया, "रोहतांग सुरंग का निर्माण होने से रोहतांग दर्रे के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में मदद मिलेगी।"

13,050 फुट की ऊंचाई पर स्थित इस दर्रे के परिस्थितिकी तंत्र को पर्यटकों की बढती तादाद और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण से नुकसान पहुंच रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो जून से नंवबर के बीच प्रति दिन 2,000 से अधिक वाहनों का यहां आवागमन होता है इनमें सैन्य वाहनों की तादाद अधिक होती है क्योंकि इस दर्रे से होकर ही सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति होती है।

गौरतलब है कि पंजाब, हरियाणा, चण्डीगढ़, दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात से 100,000 से अधिक पर्यटक जून तक यहां पहुंच चुके हैं। भारी हिमपात की वजह से छह महीने तक रोहतांग दर्रे का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से टूट जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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