सेना में 2 महीने में महिलाओं को स्थाई कमीशन (लीड-1)
सरकार के इस कथन के बाद सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश जे.एम.पंचाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सेना और वायुसेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को लागू नहीं करने के कारण रक्षा मंत्रालय के खिलाफ शुरू की गई न्यायालय की अवमानना प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
सर्वोच्च न्यायालय ने 26 जुलाई को मंत्रालय से सेना की उस अधिसूचना को पेश करने के लिए कहा था, जिसमें महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने की मनाही थी।
सेना ने महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सेना की अपील पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिया। वायु सेना पहले ही महिलाओं को स्थाई कमीशन की मंजूरी दे चुकी है।
रक्षा मंत्रालय ने सेना कानून, 1950 की धारा 12 को आधार बनाया, इसके अनुसार महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन नहीं देने का प्रावधान है।
अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पराग त्रिपाठी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि सेना कानून की धारा 12 को संवैधानिक संरक्षण हासिल है, जो रक्षा सेवाओं में नियुक्ति पर कुछ निश्चित प्रतिबंध लगाता है।
त्रिपाठी के तर्क के जवाब में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस आपत्ति को उच्च न्यायालय के सामने भी उठाया जा चुका है।
प्रतिवादी बबिता पांडे के वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय के सामने भी यह आपत्ति खारिज हो गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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