अब एसएसकेएम अस्पताल में 'ब्रेस्ट मिल्क' बैंक
कोलकाता, 2 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में से एक कोलकाता के राज्य द्वारा संचालित एसएसकेएम अस्पताल में मां के दूध का एक बैंक ('ब्रेस्ट बैंक') शुरू हो रहा है। पूर्वी भारत में यह अपनी तरह का पहला बैंक होगा जबकि देश में यह ऐसा दूसरा बैंक होगा।
बच्चे को जन्म देने के छह माह की अवधि में बीमार पड़ जाने वाली माताओं के शिशुओं को यहां से दूध मिल सकेगा। यही नहीं जिन माताओं में दूध नहीं बनता है उनके शिशुओं को भी इस बैंक से दूध मिल जाएगा।
अस्पताल के 'नीयो-नेटोलॉजी' विभाग के प्रमुख अरुण सिंह कहते हैं कि यह बैंक समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के लिए एक वरदान की तरह होगा। 'नीयो-नेटोलॉजी' बाल रोग विज्ञान की एक शाखा है जिसके तरत शिशुओं और खासतौर पर बीमार पड़ने या विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले शिशुओं की चिकित्सकीय देखभाल की जाती है।
यह नई शुरुआत करने वाले अरुण सिंह ने आईएएनएस से कहा, "मनुष्य का दूध मनुष्य के लिए होता है और यह अद्वितीय है। यह 'ब्रेस्ट मिल्क' बैंक कई बीमार शिशुओं, समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों और जिन नवजातों की मां दूध उत्पन्न नहीं कर सकतीं उनकी मदद करेगा।"
देश का अब तक का पहला और अकेला 'ब्रेस्ट मिल्क' बैंक महाराष्ट्र में है। इसके विपरीत ब्रिटेन, अमेरिका और स्वीडन जैसे देशों में 'ब्रेस्ट मिल्क' बैंक बहुत लोकप्रिय हैं।
यह बैंक उन माताओं से दूध लेते हैं जिनमें अपने बच्चों को दुग्धपान कराने के बाद भी बहुत दूध बनता है।
दो सौ चालीस वर्ष पुराने सेठ सुखलाल करनानी मेमोरियल (एसएसकेएम) अस्पताल के अधीक्षक देवाशीस भट्टाचार्यजी कहते हैं, "हम कुछ महीनों के अंदर 'ब्रेस्ट मिल्क' बैंक शुरू कर रहे हैं। नवजातों को दूध पिलाने के बाद बचे हुए शेष दूध को माताओं की पूर्ण स्वीकृति के बाद संग्रहित किया जाएगा।"
सिंह ने कहा कि अस्पताल रक्त दान शिविरों की तरह ही मां के दूध वाले दुग्ध दान शिविर आयोजित करने की योजना बना रहा है, जहां माताओं को दूध दान करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
शिशु के अन्य आहार लेने व पचाने योग्य होने से पहले तक मानव दूध नवजातों में पोषण का प्राथमिक और एक मात्र स्रोत होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications