मायावती का नोएडा उद्यान खटाई में
दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय ने कह दिया है कि यदि वह इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि उद्यान वन भूमि पर है तो उसका निर्माण रोका जा सकता है।
केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि नोएडा उद्यान परियोजना पर स्थगन आदेश तब तक जारी रखा जाए, जब तक राज्य सरकार बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएचएनएस) और विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा तय सभी आवश्यक कदमों को नहीं उठाती। इसमें राज्य में इको सेंसिटिव जोन (ईएसजे) की घोषणा जैसे कदम शामिल हैं।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने प्रधान न्यायाधीश एस.एच.कपाड़िया, न्यायमूर्ति आफताब आलम और के.एस.राधाकृष्णन की खण्डपीठ को बताया कि वह राज्य सरकार को 27 मई, 2005 से ही कह रहा है कि वह राज्य में ईएसजे घोषित करे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
मंत्रालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने तरीके से कानून की धज्जी उड़ाने की कोशिश कर रही है।
सहायक वन महानिरीक्षक उमाकांत की ओर दाखिल हलफनामे में कहा गया है, "क्या राज्य सरकार ने राज्य में ईएसजे की घोषणा की है। यदि ऐसा किया जाएगा तो एक कानूनी अड़चन खड़ी होगी, क्योंकि उद्यान ईएसजे की सीमा का अतिक्रमण करेगा।"
मंत्रालय ने अदालत से कहा कि सभी जरूरी शर्तो को पूरा करने के बाद राज्य सरकार एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, उसके बाद मंत्रालय उसका परीक्षण करेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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