समझौता एक्सप्रेस विस्फोट की जांच एनआईए के हवाले

अपने मंत्रालय की जून की मासिक प्रगति रिपोर्ट जारी करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, "एनआईए को समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट और हैदराबाद में डेलाइट टच तोहमास्तु पर हमले की योजना की जांच का निर्देश दिया गया है।"

उन्होंने कहा कि ये मामले एनआईए के हवाले इसलिए किए जा रहे हैं क्योंकि इन्हें अब तक नहीं सुलझाया जा सका है।

गृह मंत्री ने कहा, "कुछ पुराने मामले हैं जिन्हें अब तक नहीं सुलझाया जा सका है। उन्हें एनआईए को सौंपा जा रहा है क्योंकि हम इन मामलों को सुलझाना चाहते हैं। इनमें समझौता एक्सप्रेस एक उदाहरण है।"

18 फरवरी 2007 में हरियाणा के पानीपत में दीवाना रेलवे स्टेशन के पास समझौता एक्सप्रेस में बम विस्फोट हुए थे जिनमें कम से कम 68 लोग मारे गए थे। यह ट्रेन भारत-पाकिस्तान के बीच चलती है।

एक अन्य मामले में इसी साल लश्कर-ए-तैयबा के एक संदिग्ध सदस्य को गिरफ्तार किया गया था जो हैदराबाद में एक बहुराष्ट्रीय लेखा कंपनी डेलाइट टच तोहमास्तु पर हमले की योजना बना रहा था।

समझौता एक्सप्रेस मामले की जांच हरियाणा के विशेष जांच दल के जिम्मे थी। मालेगांव बम विस्फोटों की जांच करने वाली महाराष्ट्र पुलिस ने एक बार कहा था कि समझौता एक्सप्रेस में हुए बम विस्फोटों के पीछे कट्टर हिंदूवादी ताकतों का हाथ है।

लेकिन चिदंबरम ने किसी की तरफ उंगली उठाने से इंकार किया और कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इन मामलों को सुलझाने के लिए एनआईए सबसे बेहतर एजेंसी है क्योंकि यह अजमेर बम विस्फोट, मक्का मस्जिद विस्फोट और मालेगांव हमलों जैसे अंतर्राज्यीय जांचों को देख सकती है। इन सभी मामलों की जांच तीन अलग-अलग राज्यों की पुलिस एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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