मप्र में दवा परीक्षण मामले की जांच होगी
भोपाल, 30 (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार दवा परीक्षण (ड्रग ट्रायल) मामले की जांच कराएगी। स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया ने शुक्रवार को विधानसभा में यह घोषणा की है।
पिछले दिनों इंदौर की एक समाजसेवी संस्था ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में दवा परीक्षण की एक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर ब्यूरो ने महाराजा यशवंत राव अस्पताल के सात चिकित्सकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दवा परीक्षण का यह मामला शुक्रवार को विधानसभा में भी गूंजा। विधायक पारस जैन, सुदर्शन गुप्ता व यशपाल सिंह सिसौदिया द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में कहा गया कि प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में कई विदेशी कंपनियों द्वारा दवाओं का परीक्षण किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को इस बात की जानकारी तक नहीं होती है। इस परीक्षण के एवज में मरीजों को किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं दिया जाता है।
विधायकों का आरोप है कि इस आशंका को नहीं नकारा जा सकता कि इन परीक्षणों के लिए 'ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया' से न तो अनुमति ली गई है और न ही ये दवाएं 'क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री इंडिया' में पंजीकृत हैं।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री हार्डिया ने विधानसभा में घोषणा की है कि चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित कर दवा परीक्षण मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने दवा परीक्षण पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि ऐलोपैथी दवाओं के विकास व विपणन की अनुमति प्राप्त करने के लिए दवा परीक्षण अनिवार्य है। इंदौर के दवा परीक्षण मामले का जिक्र करते हुए हार्डिया ने कहा कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में तमाम दिशा-निर्देशों की एक सूची बनी है।
उन्होंने आगे बताया कि मरीजों से हिंदी में विस्तारपूर्वक सहमति पत्र भरवाए जाते हैं। इसके अलावा संभावित दुष्परिणामों के संबंध में भी मरीजों को बताया जाता हैं। इसके बावजूद दुष्प्रभाव होने पर उपचार की व्यवस्था बीमा कंपनी द्वारा की जाती है। इतना ही नहीं मरीज व उसके परिजनों को इस बात की स्वतंत्रता होती है कि वे दवा परीक्षण प्रक्रिया से कभी भी अपने को अलग कर सकते हैं।
हार्डिया ने माना है कि शाासकीय चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में पोलियो व स्वाइन फ्लू टीकों का परीक्षण किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications