मिसाइल इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण (लीड-2)
भुवनेश्वर, 26 जुलाई (आईएएनएस)। भारत ने शत्रु की ओर से आने वाली मिसाइलों से सुरक्षा की अभेद्य ढाल तैयार करने के लिए सोमवार को लगातार चौथी बार एक बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि यह इंटरसेप्टर मिसाइल शत्रु का प्रक्षेपास्त्र बीच रोककर उसे नष्ट करने की क्षमता से युक्त है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार स्वदेशी तकनीक से विकसित इस मिसाइल को उड़ीसा के भद्रक जिले में धामरा के निकट व्हीलर द्वीप से दागा गया। यह स्थान भुवनेश्वर से 170 किलोमीटर दूर है।
इस मिसाइल ने बालासोर जिले के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्व मार गिराया। आईटीआर से पृथ्वी-द्वितीय की परिवर्तित संस्करण को दागा गया था।
एकल अवस्था वाली इंटरसेप्टर मिसाइल निर्देशित मुखास्त्र और अन्य अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस थी। इसने अंत:-वायुमंडलीय क्षेत्र में 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने लक्ष्य को भेद दिया।
आईटीआर के निदेशक एस. पी. दास ने आईएएनएस को बताया, "यह एक सफल परीक्षण था। इंटरसेप्टर ने लक्ष्य को नष्ट कर दिया।"
लक्ष्य मिसाइल छोड़े जाने के कुछ मिनट बाद इंटरसेप्टर मिसाइल दागी गई। इंटरसेप्टर ने लक्ष्य मिसाइल को नष्ट करके उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए।
उन्होंने बताया कि विभिन्न राडारों और सेंसरों द्वारा इस पर नजर रखी गई। उन्होंने बताया कि कमान, नियंत्रण, संचार और राडार ने संतोषजनक ढंग से काम किया।
रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख वी. के. सारस्वत से फोन पर बात की और इस सफल परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी।
इस मौके पर सारस्वत, एडवांस्ड सिस्टम्स लेब्रोरेटरी (एएसएल), हैदराबाद के निदेशक अविनाश चंद्र और डीआरडीओ के मुख्य नियंत्रक के. शेखर सहित अनेक वैज्ञानिक और रक्षा अधिकारी मौजूद रहे।
डीआरडीओ एक द्विस्तरीय रक्षा प्रणाली विकसित कर रही है। इसमें अंत:-वायुमंडलीय अवरोधन के लिए एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम (एएडी) और बाह्य-वायुमंडलीय अवरोधन (50 से 80 किलोमीटर) के लिए पृथ्वी वायु रक्षा (पीएडी) शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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