महंगाई घटेगी लेकिन लक्ष्य से पीछे रहेगा देश : प्रधानमंत्री (राउंडअप इंट्रो-1)
नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि इस बार मानसून में अच्छी वर्षा की उम्मीद है, लिहाजा इससे वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई दर को छह प्रतिशत तक लाने में मदद मिलेगी। लेकिन इसके साथ ही सिंह ने स्वीकार किया कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य फिर भी पूरे नहीं होंगे। सिंह ने उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर प्रौद्योगिकी इजाद करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सिंह ने इस बात पर संतोष जताया कि विकास प्रक्रिया में पीछे रह गए राज्यों ने वर्ष 2011-12 में समाप्त होने जा रही योजना के पहले ढाई साल में तेजी दिखाई है।
राष्ट्रीय विकास परिषद की 55वीं बैठक के आरंभिक सत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना के लक्ष्यों तक नहीं पहुंचने के बावजूद हाल के वर्षो में देश की आर्थिक वृद्धि अप्रत्याशित रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) की मध्यावधि समीक्षा के अनुसार योजना के लिए तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सकेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें उम्मीद है कि थोक मूल्य सूचकांक दिसंबर तक गिरकर छह प्रतिशत के करीब आ जाएगा।"
उन्होंने कहा, "मौजूदा समय में महंगाई का मुख्य कारण खाद्य पदार्थो की कीमतों में वृद्धि है। इस बार मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है। इससे वर्ष की दूसरी छमाही में खाद्य पदार्थो की कीमतों में कमी आएगी।"
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना की मध्यावधि समीक्षा के लिए आयोजित इस बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, योजना आयोग के सदस्य और केंद्रीय मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण सदस्य शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि मौजूदा पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत तय लक्ष्य हासिल नही हुए हैं पर वर्ष 2007-12 के दौरान देश की औसत आर्थिक विकास दर 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह नौ प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के अनुमान से कम है लेकिन किसी भी योजना के दौरान हासिल आर्थिक वृद्धि दर से अधिक है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के तीन वर्ष बीत चुके हैं, इसलिए इसकी समीक्षा तथा उम्मीद से कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों की कमियों की पहचान कर सुधार के लिए कदम उठाने जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि 11वीं योजना में नौ प्रतिशत वार्षिक की दर से समग्र विकास का लक्ष्य रखा गया है। वैश्विक मंदी और वर्ष 2009 में गंभीर सूखे के बावजूद आर्थिक वृद्धि दर बेहतर रही है। ग्यारहवीं योजना की मध्यावधि समीक्षा के अनुसार इस योजना के दौरान 8.1 प्रतिशत वार्षिक की दर से आर्थिक विकास होगा।
प्रधानमंत्री कहा कि देश में आधारभूत संरचनाओं के विकास के लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे हैं और बड़ी परियोजनाओं को लागू करने की रणनीति पर फिर से काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "लगातार 8-10 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के लिए देश में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है। हमें भविष्य में काफी अधिक काम करने की आवश्यकता है।"
प्रधानमंत्री ने अगले वित्तीय वर्ष से पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान कर लागू करने के प्रयासों में राज्य सरकारों का समर्थन भी मांगा।
उन्होंने कहा, "संसाधन जुटाने में कर ढांचे और कर प्रशासन में सुधार एक अन्य महत्वपूर्ण कदम है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू किया जाना इस संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और मैं मुख्यमंत्रियों से आग्रह करूंगा कि एक अप्रैल 2011 से जीएसटी को लागू करने के प्रयासों को वे पूरा समर्थन दें।"
सिंह ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में 'समग्र विकास योजना' की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में सरकार की मौजूदा विकास योजनाओं का लाभ जनजातीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "इन पिछड़े और निर्धन खासकर जनजातीय जनसंख्या वाले इलाकों में हमारी विकास योजनाएं ठीक तरह काम नहीं कर रही हैं।"
उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाना चाहती है। 'आदिवासी' शब्द के अनुरूप ये लोग इन क्षेत्रों के मूल निवासी हैं और इनके अधिकारों का पूर्ण संरक्षण होना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस बात में कोई शक नहीं कि नक्सल समस्या से निपटने की जरूरत है और इससे राज्यों और केंद्र सरकार के बीच आपसी समन्वय से निपटा जाएगा।
उन्होंने हालांकि यह भी कहा, "हम बेहतर प्रशासन के जरिए लोगों की भागीदारी और रोजगार बढ़ाना चाहते हैं। कानूनों (वन अधिकार और पंचायती राज अधिनियम) को लागू करने में असफलता से इन इलाकों में विकास करने के हमारे प्रयासों की विश्वसनीयता कम हुई है।"
उन्होंने कहा, "मैंने योजना आयोग को प्रदेशों और हितग्राहियों से विचार-विमर्श करके इन इलाकों में समग्र विकास के लिए योजना बनाने के लिए कहा है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में विकास योजनाओं के संचालन के लिए कर्ज पर निर्भरता को कम करने की जरूरत है इसके लिए सब्सिडी में कमी लाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "योजना व्यय के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में कर्ज पर निर्भरता बहुत ज्यादा है। इस स्थिति को बदला जाना चाहिए।"
सिंह ने कहा कि राजकोषीय घाटे में कमी के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के नुकसान को घटाने और गरीबों को दी जाने वाली सब्सिडी के तरीके में बदलाव की जरूरत है।
एनडीसी की बैठक के समापन के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर प्रौद्योगिकी इजाद करने और उसे कार्यान्वित करने की जरूरत है।
सिंह ने कहा कि कृषि संबंधी अधोसंरचना में निजी क्षेत्रों को आकर्षित करने के लिए हमें कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) कानून में व्यापक सुधार करने की आवश्यकता है। हमें कृषि उत्पादों के अंतर्राज्यीय और राज्य के भीतर आवागमन सुनिश्चित कराने की भी आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बैठक में उपस्थित कई मुख्यमंत्रियों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को मजबूत बनाने की बात उठाई है। हमें प्रस्तावित नए खाद्य सुरक्षा कानून को यथा संभव जल्द से जल्द कार्यान्वित करने की भी आवश्यकता है।
सिंह ने कहा कि कई लोगों ने जल संसाधनों से संबंधित मुद्दे उठाए हैं। यह स्पष्ट है कि देश के सिकुड़ते जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है। मैंने योजना आयोग से कहा है कि वह जल संसाधन प्रबंधन के लिए एक एकीकृत नीति तैयार करे, जिस पर एनडीसी की अगली बैठक में चर्चा की जा सके।
बैठक में कई मुख्यमंत्रियों ने शहरीकरण के द्वारा खड़ी हुई चुनौतियों और मुद्दों को उठाया। सिंह ने मुख्यमंत्रियों की इस टिप्पणी के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
सिंह ने कहा कि शहरीकरण के सभी पहलुओं के परीक्षण के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद की एक उपसमिति गठित की जाएगी।
सिंह ने कहा, "मैं केंद्रीय शहरी विकास मंत्री, एस.जयपाल रेड्डी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विकास परिषद की एक उपसमिति गठित करने का प्रस्ताव करता हूं। यह समिति इन मुद्दों का गहराई से परीक्षण करेगी और 12 महीने के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में एक सामग्री के रूप में शामिल किया जाएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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