महाराष्ट्र सरकार से मात खा गए नायडू
नांदेड़ (महाराष्ट्र), 25 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) नेता एन. चंद्रबाबू नायडू एवं उनके समर्थक नेताओं को यह कहते हुए राज्य छोड़ने के लिए दबाव बनाया कि उन पर से सभी मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे। लेकिन अब सामने आया है कि केवल मामूली मुकदमे ही वापस लिए गए।
नायडू एवं उनके समर्थक नेताओं ने भारी हंगामे के बाद अनिच्छापूर्वक विशेष विमान से महाराष्ट्र छोड़ दिया था। यह वाकया उन्हें लंबे समय तक सालता रहेगा।
जिले के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार यद्यपि राज्य सरकार ने वादा निभाया और निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसे मामूली मुकदमे वापस ले लिए, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस कर्मियों पर हमला सहित अन्य आपराधिक मामले अब तक लंबित हैं।
नांदेड़ के कलक्टर अजय घुलाने के अनुसार जिले के अन्य अधिकारियों ने तत्परतापूर्वक राज्य सरकार के निर्देशों का पालन किया और नायडू एवं 65 अन्य के खिलाफ दायर निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले वापस ले लिए।
घुलाने ने आईएएनएस को बताया, "ये मुकदमे 16 जुलाई को तब दर्ज किए गए थे जब नायडू और उनके सहयोगियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए धर्माबाद एवं अन्य इलाकों में प्रवेश किया।"
धर्माबाद थानाध्यक्ष एस.एस. मुंडे के मुताबिक 20 जुलाई को जब पुलिस अधिकारी तेदेपा कार्यकर्ताओं को हर्षुल स्थित औरंगाबाद केंद्रीय कारागार जाने के लिए मनाने धर्माबाद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पहुंचे तब उन्होंने वहां जाने से इंकार कर दिया।
पुलिस कर्मियों ने उन्हें बताया था कि उनकी मांग के मुताबिक सरकार ने सुविधाजनक सफर के लिहाज से औरंगाबाद के लिए वातानुकूलित निजी बस की व्यवस्था करवाई है।
नायडू ने हालांकि गोदावरी नदी पर बन रहे विवादास्पद बाभली बांध के स्थल को देखे बिना कहीं भी जाने से इंकार कर दिया था।
एक अधिकारी ने बताया कि जब पुलिस कर्मियों ने जोर दिया, तब नायडू क्रोधित हो गए और उनके समर्थक चिल्लाने लगे और उन्हें गाली देने लगे। नायडू के समर्थकों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की।
इस घटना में कुल 10 पुलिसकर्मी घायल हो गए। आखिरकार सुरक्षा जवानों ने उन नेताओं को जबरन औरंगाबाद की बस में बिठाया।
मुंडे के अनुसार नायडू एवं उनके कुछ विधायकों सहित 30 समर्थकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
पुलिस के मुताबिक भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 323, 324, 506, 504 तथा 123 के तहत विभिन्न मामले दर्ज किए गए।
घुलाने ने कहा, "जब मामलों पर कार्रवाई शुरू होगी तब पुलिस सुनवाई के दौरान धर्माबाद में हाजिर होने के लिए आरोपियों को सम्मन भेजेगी। यदि वे हाजिर नहीं होंगे तब उनके खिलाफ समुचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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