महिला आरक्षण, परमाणु दायित्व विधेयक पर रहेगी नजर
महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाली पार्टियां लोकसभा में इसकी खिलाफत के लिए तैयार हैं। उधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम दलों का इरादा परमाणु दायित्व विधेयक का पूरी ताकत से विरोध करने का है।
महिलाओं को लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाला विधेयक नौ मार्च को राज्यसभा में पारित किया गया था। समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने विधेयक का कड़ा विरोध किया था।
सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सरकार जब तक सभी दलों की चिंताओं को दूर नहीं करती वह विधेयक का विरोध करना जारी रखेंगे।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शैलेंद्र कुमार ने आईएएनएस से कहा, "विधेयक के अंदर पिछड़ी, दलित, अल्पसंख्यक महिलाओं को आरक्षण देने की हमारी मांग कायम है। इससे कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं है।"
उन्होंने कहा कि विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता अन्य दलों के नेताओं के संपर्क में हैं।
संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाली पार्टियों से परामर्श के बाद मानसून सत्र में इस विधेयक को लोकसभा में पेश किए जाने की आशा है।
तृणमूल कांग्रेस भी महिला आरक्षण विधेयक के मौजूदा स्वरूप के खिलाफ है। बहरहाल कांग्रेस और भाजपा और वाम दल विधेयक के पक्ष में हैं।
विवादास्पद परमाणु नागरिक दायित्व विधेयक, 2010 को बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था। भाजपा और वाम दलों के विरोध की आशंका के कारण संसद की स्थाई समिति ने बाद में विधेयक को वापस ले लिया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक बयान में कहा कि विधेयक को संसद में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
भाजपा ने भी कहा कि वह विधेयक का विरोध करेगी। पार्टी प्रवक्ता रामनाथ कोविद ने आईएएनएस से कहा कि विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए। यह विधेयक भारत के लोगों के लिए नहीं है। भोपाल गैस त्रासदी के 25 वर्ष बाद काफी कम हर्जाने के फैसले को देखते हुए विधेयक को नहीं पेश किया जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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