नाटो को तालिबान की सत्ता में वापसी का डर

समाचार एजेंसी ईएफई के अनुसार रासमुसेन ने यहां पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम अपने काम को पूरा किए बगैर, पहले ही अफगानिस्तान नहीं छोड़ सकते। ऐसे में तालिबान आसानी से सत्ता पर वापस काबिज हो जाएगा। अफगानिस्तान एक बार फिर आतंकी हमलों की साजिश रचने का अड्डा बन सकता है।"

रासमुसेन ने कहा कि लक्ष्य यह है कि अफगानी सुरक्षा बल वर्ष 2014 तक देश में सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभाल लें, लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी का यह हस्तांतरण अफगानिस्तान के हालात पर अधिक निर्भर करेगा।

रासमुसेन ने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना है कि हालात हस्तांतरण के अनुकूल हो जाएं। हम तब तक वहां बने रहेंगे, जब तक हम स्थायित्व को लेकर सुनिश्चित नहीं हो जाते। हम कोई कसर नहीं छोड़ेगे। अफगानिस्तान को नाटो का वादा दीर्घकालिक है।"

इसके साथ ही रासमुसेन ने उन उदार तालिबानी तत्वों के साथ सुलह प्रक्रिया का समर्थन किया, जो हिंसा त्यागना चाहते हैं और अफगानिस्तान के संविधान और लोकतंत्र का आदर करना चाहते हैं।

नाटो महासचिव ने कहा कि अफगानी राष्ट्रपति हामिद करजई द्वारा पेश की गई इस रणनीति में पाकिस्तान भी कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस संदर्भ में कुरैशी ने कहा कि इस्लामाबाद इसमें कोई भूमिका नहीं चाहता, यह तो अफगानिस्तान सरकार को तय करना चाहिए कि इस प्रक्रिया में पाकिस्तान कैसे और कितना मदद कर सकता है।

कुरैशी ने कहा, "पाकिस्तान किसी भूमिका की तलाश में नहीं है। यह प्रक्रिया शुद्ध रूप से अफगानिस्तान की और अफगानिस्तान के नेतृत्व वाली होनी चाहिए। यह उन्हें तय करना है कि क्या वे हमारी कोई भूमिका चाहते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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