चालक पर रेल दुर्घटना के आरोप से परिवार दुखी

शोक में डूबीं डे की तीन बेटियों ने मंगलवार को सच का पता लगाने के लिए दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा उनके पिता को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराने पर उनकी आलोचना की।

उनकी बेटियों में से एक मुनमुन का कहना है, "हम दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच चाहते हैं। मेरे पिता न केवल एक अच्छे चालक बल्कि एक अच्छे इंसान भी थे। मेरे पिता रेलगाड़ी चलाते वक्त लापरवाही नहीं बरतते थे। ये सभी दावे बकवास हैं कि रेलगाड़ी चलाते समय मेरे पिता सो गए थे।"

डे को रेलवे की ओर से 'ड्राइवर ऑफ द ईयर' पुरस्कार से भी नवाजा गया था। एक पारिवारिक सदस्य ने बताया कि उनकी सेवानिवृत्ति में केवल 22 महीने ही बचे थे।

डे की बेटी सोमा ने कहा, "मेरे पिता एक गैर जिम्मेदार व्यक्ति नहीं थे। मेरे पिता अच्छे रेलगाड़ी चालक थे। वह 1975 से ही यह काम कर रहे थे। यदि कोई कहता है कि मेरे पिता की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ तो इसका मतलब है कि कुछ खामियां हैं जिन पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।"

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय ने सोमवार को पत्रकारों से कहा था कि प्राथमिक सबूतों के आधार पर ऐसा लगता है कि वनांचल एक्सप्रेस में उत्तरबंगा एक्सप्रेस को भिड़ने से रोकने के लिए डे और सहायक चालक निर्मल मंडल ने न तो ब्रेक का इस्तेमाल किया था और न ही हादसे को रोकने के लिए आपातकालीन ब्रेक लगाने की कोशिश की। मंडल की भी दुर्घटना स्थल पर ही मौत हो गई थी।

सोमवार रात पश्चिम बंगाल के सैंथिया स्टेशन पर खड़ी वनांचल एक्सप्रेस के तीन डिब्बों से उत्तरबंगा एक्सप्रेस के टकराने से हुए हादसे में कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई और 150 घायल हुए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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