इसरो ने विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण में रचा इतिहास
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 12 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तीन विदेशी उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर दूसरे देशों के उपग्रहों के प्रक्षेपण में सोमवार को एक नया इतिहास रच डाला। इस तरह इसरो अब तक कुल 25 उपग्रहों का प्रक्षेपण करने वाली अंतरिक्ष एजेंसी बन गई है।
इसरो के पोलर सैटेलाइट लांच व्हिकल (पीएसएलवी) ने उस समय 25 उपग्रहों के प्रक्षेपण का कीर्तिमान स्थापित कर लिया, जब उसने अल्जीरिया के दूर संवेदी उपग्रह अलसैट-2ए (116 किग्रा) और दो नैनो उपग्रहों - युनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो, कनाडा द्वारा निर्मित 6.5 किग्रा के एनएस 6.1 एआईएसएसएटी-1 तथा युनिवर्सिटी ऑफ अप्लाइड साइंसेस, स्विटजरलैंड द्वारा निर्मित एक किग्रा वजन वाले एनएलएस 6.2 टीआईएसएटी- को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया।
सोमवार के सफल प्रक्षेपण के साथ ही इसरो ने अपने पीएसएलवी रॉकेट के साथ एक बार फिर कई उपग्रहों के प्रक्षेपण में अपनी क्षमता साबित कर दी है और वह भी विभिन्न कक्षाओं में। ये कक्षाएं हैं - ध्रुवीय सूर्य समकालिक कक्षा, भू-समकालिक हस्तांतरण कक्षा, और अति अंडाकार व पृथ्वी की निम्न कक्षाएं।
इसरो, कई वर्षो से कई सारे प्रक्षेपणों को संपन्न करता आ रहा है। वर्ष 2008 में एक बार में 10 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर इसने विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था।
इसरो ने अपने पीएसएलवी रॉकेट के जरिए विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण की शुरुआत 1999 में उस समय की थी, जब इसने दक्षिण कोरिया के 110 किग्रा वजन वाले किटसैट-3 तथा जर्मनी के 45 किग्रा वजन वाले डीएलआर-टबसैट का प्रक्षेपण किया था।
प्रारंभ में विदेशी अंतरिक्ष उपकरणों को, इसरो के अपने उपग्रहों के साथ अतिरिक्त सामान के रूप में मुख्यरूप से उपलब्ध कार्गो स्पेस का उपयोग करने तथा कुछ राजस्व हासिल करने की प्रक्रिया में लिया गया था।
इसके साथ ही इसरो ने पीएसएलवी का अपना एक बिल्कुल अलग संस्करण तैयार कर लिया है। अपेक्षाकृत यह हल्का रॉकेट सामान्य छह पट्टों वाले मोटर से रहित है। इस तरह की व्यवस्था प्रारंभिक उड़ान के दौरान अतिरिक्त ताकत देती है।
इसरो ने अपने पीएसएलवी रॉकेट के जरिए अब तक जिस सर्वाधिक वजन वाले विदेशी उपग्रह का प्रक्षेपण किया है, वह इटली का 350 किग्रा वजन वाला उपग्रह 'एजिल' था, जिसे 2007 में प्रक्षेपित किया गया था।
चूंकि पीएसएलवी की अधिकतम वाहक क्षमता लगभग 1,750 किग्रा है, लिहाजा इसरो ने दो टन से अधिक वजन वाले उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए एक और रॉकेट, जीयोसिन्क्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल (जीएसएलवी) विकसित किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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