भोपाल गैस पीड़ितों को इंसाफ मिले : गौर
गौर ने शनिवार को नई दिल्ली में कर्नल अजय नारायण मुशरान स्मृति व्याख्यान में 'जस्टिस टू भोपाल टू लिटिल टू लेट' विषय पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 26 साल बाद भी गैस पीड़ितों को न तो राहत मिली और न ही न्याय मिला। लोगों के जख्म आज भी ताजा हैं।
उन्होंने कहा कि 1989 में भारत सरकार और यूनियन कार्बाइड प्रबंधन के बीच हुए समझौते के बाद केंद्र सरकार ने यह वचन दिया था कि गैस पीड़ितों को राहत वितरण में 719 करोड़ रुपये की समझौता राशि कम पड़ी तो शेष आवश्यक राशि सरकार अपनी ओर से देगी। इस वचन को पूरा नहीं किया गया और गैस पीड़ितों के साथ अन्याय हुआ है।
गौर ने कहा, "56 वाडरें के 8 लाख नागरिक आज भी जहरीली गैस का दंश झेल रहे हैं और वे अनेक ज्ञात और अज्ञात बीमारियों के शिकार हैं। इस दर्दनाक त्रासदी के 26 साल बाद भी केन्द्र सरकार ने न तो पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा दिया है और न ही आरोपियों को उचित दंड दिला सकी है।"
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा गैस पीड़ितों के उपचार के लिए संचालित 6 अस्पतालों और 27 डिस्पेंसरियों के लिए केन्द्र सरकार ने कोई राशि राज्य सरकार को उपलब्ध नहीं करवाई है। राज्य सरकार हर साल गैस पीड़ितों के इलाज के लिए 45 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर रही है।
गौर ने बताया कि गैस दावा अदालतों ने 5 लाख 68 हजार लोगों को गैस पीड़ित मानकर मुआवजा राशि दी है लेकिन 21 जून 2010 को दिल्ली में हुई बैठक में केंद्र सरकार के मंत्री समूह ने उनमें से केवल 42 हजार लोगों को एक लाख से 5 लाख रुपये तक और गैस दुर्घटना में मृत 15342 में से 5295 मृतकों के आश्रितों को ही 10 लाख रुपये तक का मुआवजा देने का निर्णय दिया है।
गौरतलब है कि 26 साल पहले विश्व की इस भीषणतम औद्यौगिक त्रासदी में 15 हजार से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और हजारों आज भी इस त्रासदी से पीड़ित हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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