जीवित रहते नहीं दी पेंशन अब देना पड़ेगा हर्जाना
इस महिला कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद 10 साल तक पेंशन नहीं मिली थी।
उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य निरीक्षक रहीं चंपा देवी 1992 में सेवानिवृत्त हुई थीं। लेकिन 10 साल बाद उनकी मौत होने तक सरकार ने उन्हें पेंशन का भुगतान नहीं किया।
एनएचआरसी ने अपने एक बयान में कहा, "पेंशन महानिदेशालय ने चंपा देवी को पेंशन का भुगतान करने का आदेश सेवानिवृत्ति के 11 साल बाद 11 फरवरी 2004 को जारी किया जबकि इससे एक महीने पहले 7 जनवरी 2004 को उनकी मौत हो गई।"
आयोग द्वारा इस मामले में लगातार कार्यवाही के निर्देश के बाद 26 अक्टूबर 2004 को पेंशन महानिदेशालय ने पेंशन का भुगतान चंपादेवी के दोनों बेटों को किए जाने की सूचना दी और कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेंशन देने में देरी की गई है।
इस मामले को मानवाधिकारों का स्पष्ट हनन मानते हुए आयोग ने कहा, "देरी के लिए कोई भी जिम्मेदार हो असलियत यही है कि गरीब पेंशनभोगी को उनके जीवित रहने के समय पेंशन नहीं मिली और राज्य सरकार इस मामले में महिला के परिवारजनों को हर्जाना देने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।"
बयान में कहा गया, "सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन देने का उद्देश्य उन्हें गरिमा के साथ जीवन जीने का जरिया उपलब्ध कराना है और यह मानवाधिकारों का हिस्सा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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