भारत बंद का देश भर में दिखा व्‍यापक असर

Bharat Bandh protest
नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और महंगाई के खिलाफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और वामपंथी दलों समेत सभी विपक्षी दलों के आहृवान पर सोमवार को आयोजित भारत बंद का सभी जगह व्‍यापक असर दिखा। इस बंद से देश की अर्थव्‍यवस्‍था को करोड़ों रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

सभी राज्‍यों में सड़कों पर बहुत कम वाहन दिखाई दिये, दुकाने व बाजार बंद रहे। जहां-जहां प्रतिष्‍ठान खुले पाए गए, वहां विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामे किए। जिसके चलते पुलिस ने कई जगह लाठियां भी भांजी। यही नहीं कार्यकर्ताओं ने कई जगह तोड़फोड़, आगजनी व पथराव भी किए।

देश के पूर्वी हिस्से में रेलगाड़ियों के आवागमन पर बुरा असर पड़ा है। बंद के कारण 73 रेलगाड़ियां रद्द कर दी गईं और 192 रेलगाड़ियों का आवागमन बाधित हुआ है। बंद का हवाई यातायात पर भी असर पड़ा। लगभग 93 घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गईं।

राजग शासित राज्‍यों में जनजीवन प्रभावित

राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और करोलबाग मेट्रो स्टेशन पर हंगामा किया। भाजपा शासित राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गुजरात में बंद का खासा असर देखा गया। छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में भी दुकानें, स्कूल और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। कनार्टक की राजधानी बेंगलुरू और अन्य स्थानों पर सरकारी बसों पर पथराव किया गया। राज्य सड़क परिवहन निगम ने पड़ोसी राज्यों तक जाने वाली बसों को भी रोका गया।

पंजाब में बंद का थोड़ा असर देखने को मिला। बठिंडा, अमृतसर, पटियाला, लुधियाना, फगवारा, मोगा और जालंधर में दुकानें बंद रहीं और निजी वाहन सड़कों पर नहीं उतरे। वाम दलों के शासन वाले पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में बंद का व्यापक असर रहा। कोलकाता में हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन सुबह से प्रभावित रहा। यहां कई जगहों पर वाम दलों के कायकर्ताओं ने रेल सेवाओं को भी बाधित किया।

यूपी में ट्रेने रोकीं

उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने रेलगाड़ियां रोकीं। लखनऊ में करीब 25 भाजपा कार्यकर्ता लाठीचार्ज में घायल हुए। पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली और उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी सहित कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शिवपाल यादव को सैंकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

आंध्र प्रदेश में भी जनजीवन प्रभावित रहा। तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) ने भी बंद का समर्थन किया था। प्रदर्शन कर रहे तेदेपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और वामदलों के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

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राजग शासित बिहार में भाजपा और जनता दल (युनाइटेड) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प ने रंग में भंग डाल दिया। राज्य में तकरीबन 3000 लोगों को हिरासत में लिया गया। झारखण्ड में 1,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। भाजपा महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और 300 से अधिक कार्यकर्ताओं को धनबाद में गिरफ्तार किया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।

राजस्‍थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित भाजपा के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। ये लोग जगह-जगह हंगामा कर रहे थे। महाराष्ट्र में बंद के दौरान भाजपा और शिव सेना कार्यकर्ताओं ने जबरन दुकानें बंद कराई। कई रेलगाड़ियां रोकी गईं। निजी विमानन कंपनियों की 46 उड़ानें रद्द की गईं क्योंकि यात्री हवाई अड्डों पर समय से नहीं पहुंच सके।

महाराष्‍ट्र में बसें फूंकी

बंद समर्थकों ने मुंबई में बेस्ट की 155 बसों को और महाराष्ट्र सड़क परिवहन निगम की 70 बसों को पथराव कर क्षतिग्रस्त कर दिया। हरियाणा में बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। चंडीगढ़ और हरियाणा में अधिकांश शैक्षणिक संस्थान, बैंक, अस्पताल, दुकानें और परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने एक बयान में कहा, "सीआईआई के अनुमान के मुताबिक बंद के कारण अर्थव्यवस्था को 3,000 करोड़ रुपये से भी अधिक का नुकसान होगा। किसी भी तरह के बंद का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी कामगारों और छोटे व्यापार पर निर्भर लोगों पर पड़ता है। परिवहन क्षेत्र भी उद्योग का एक हिस्सा है, जिस पर बंद का बड़ा असर पड़ा है।"

दूसरी ओर फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने अर्थव्यवस्था को 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया है। एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने कहा है कि भारत बंद के कारण देश में उत्पादन पर भारी असर पड़ा है। ऐसोचैम के अनुसार दिन भर उत्पादन ठप होने से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि ईंधन कीमतों में वृद्धि का विरोध कोई अर्थ नहीं रखता।

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