आंध्र प्रदेश में इनामी नक्सली सरगना ढेर (लीड-2)
हैदराबाद, 2 जुलाई (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में शुक्रवार को पुलिस के साथ मुठभेड़ में नक्सली सरगना चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद मारा गया। आजाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) में नंबर दो का दर्जा रखता था।
आजाद, प्रतिबंधित संगठन का प्रवक्ता भी था। वह हैदराबाद से लगभग 300 किलोमीटर दूर आदिलाबाद जिले में जोगापुर के निकट जंगल में तड़के लगभग तीन बजे पुलिसकर्मियों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।
मुठभेड़ के दौरान मारे गए एक अन्य नक्सली की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस ने घटनास्थल से एक ए के 47 राइफल, 9 एमएम की पिस्तौल और दो थैले बरामद किए हैं।
आजाद की मौत नक्सली संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी में पोलित ब्यूरो सदस्य कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के बाद वह नंबर दो का दर्जा रखता था।
आजाद, प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो का सदस्य था। आजाद पर 12 लाख रुपये का इनाम घोषित था। कृष्णा जिले का निवासी आजाद पिछले चार दशकों से नक्सल आंदोलन से जुड़ा हुआ था।
आदिलाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार के अनुसार नक्सलियों और पुलिस के बीच रात 10 बजे मुठभेड़ शुरू हुई और तीन बजे तक जारी रही। कुमार ने दावा किया है कि मुठभेड़ में 25 नक्सली शामिल थे। पुलिस को दो नक्सलियों के शव मिले, जबकि बाकी जंगलों में भाग गए।
अधिकारियों के मुताबिक आजाद, कांग्रेसी विधायक नरसा रेड्डी की हत्या तथा आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जनार्दन रेड्डी की हत्या की विफल कोशिश करने सहित हत्या के दर्जन भर मामलों में शामिल था।
उधर, प्रतिबंधित संगठन ने आरोप लगाया है कि आजाद को फर्जी मुठभेड़ में मारा गया है। संगठन के अनुसार पुलिस ने महाराष्ट्र के नागपुर से आजाद को उठाया था। वहां से उसे आदिलाबाद लाया गया और उसकी हत्या कर दी गई। संगठन ने कहा है कि मारा गया दूसरा नक्सली सहदेव हो सकता है।
इस बीच नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाले और क्रांतिकारी लेखक वरवरा राव ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। याचिका में इस कथित मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की गई है।
राव ने कहा है, "आजाद गुरुवार सुबह 11.30 बजे एक जनजातीय कार्यकर्ता से मिलने नागपुर में था। पुलिस ने उसे वहां से अगवा कर लिया। उसे वहां से आदिलाबाद लाया गया और प्रताड़ित किया गया। फिर एक फर्जी मुठभेड़ में उसे मार डाला गया।"
पिछले वर्ष लंदन शिक्षित नक्सली विचारक कोबद गांधी की दिल्ली में गिरफ्तारी के बाद आजाद की मौत नक्सली आंदोलन के लिए दूसरा बड़ा झटका है।
गांधी की ही तरह आजाद भी संगठन का एक बौद्धिक चेहरा माना जाता था। आजाद ने वारंगल के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक कर रखा था। वह पत्रिकाओं में नक्सली विचारधारा पर आलेख लिखा करता था। नक्सलियों के बीच वह एक कुशल रणनीतिकार माना जाता था।
आजाद मार्च में लापता हो गया था और नक्सली संगठन ने आरोप लगाया था कि आंध्र प्रदेश पुलिस ने उसे अवैध हिरासत में रखा है। लेकिन दस दिन बाद नक्सलियों ने एक दूसरा बयान जारी कर कहा था कि आजाद सुरक्षित है।
आजाद के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।
ज्ञात हो कि आजाद को पुलिस ने ऐसे समय में मारा है, जब दो दिन पहले ही नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 25 जवानों सहित 27 सुरक्षाकर्मियों को मार डाला था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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