बांगलादेश में व्यापक विरोध प्रदर्शन

इन प्रदर्शनों का आह्वान बांगलादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमाते इस्लामी ने किया था. पार्टी के प्रमुख मतीउर्रहमान निज़ामी के अनुसार पार्टी के समर्थक तीन नेताओं की गिरफ़्तारी के कारण नाराज़ हैं.
इन पर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए हैं. जमाते इस्लामी का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं. राजधानी ढाका में पुलिस ने जमाते इस्लामी के कार्यकर्ताओं को अदालत के परिसर से हटाने की कोशिश की जहां गिरफ़्तार हुए नेताओं को लाया जाना था.
बांगलादेश के एक अन्य धार्मिक संगठन बांगलादेश तरीकत फ़ैडरेशन ने मार्च के महीने में अदालत में एक मुक़दमा दायर किया था जिसमें कहा गया था कि जमात के दो नेताओं ने अपने पार्टी प्रमुख की तुलना हज़रत मोहम्मद से की थी. इस्लाम में हज़रत मोहम्मद की किसी से तुलना नहीं की जा सकती.
पुलिस ने बताया कि उसने जमाते इस्लामी के प्रमुख मौलाना मतीउर्रहमान निज़ामी, उनके सहायक अली अहसन मोहम्मद मुजाहिद और एक अन्य नेता मौलाना दिलवर हुसैन सईदी को गिरफ़्तार किया है.
कपड़ा उद्योग में हलचल
बांगलादेश के कपड़ा उद्योग से जुड़े हज़ारों कर्मियों ने भी अधिक वेतन की मांग करते हुए राजधानी ढाका में प्रदर्शन किए. उन्होने ढाका पहुंचने वाले प्रमुख राजमार्ग को बंद कर दिया और पुलिस पर पथराव किया. इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस, रबर की गोलियों और पानी की तेज़ धार का प्रयोग किया.
बांगलादेश के कपड़ा उद्योग में काम करने वाले का न्यूनतम वेतन 1,660 टाका महीना है. वो 5,000 टाका की मांग कर रहे हैं जबकि मिल मालिकों का कहना है कि वो 3,000 टाका से अधिक नहीं दे सकते. कपड़ा उद्योग बांगलादेश का सबसे बड़ा निर्यात है जिससे उसे 15 अरब डॉलर सालाना की आमदनी होती है.












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