नक्सलियों के बंद का मिलाजुला असर, झारखण्ड में हिंसा (राउंडअप)
झारखण्ड में दो दिनों के बंद के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं में नक्सलियों ने एक कांग्रेस नेता और एक भवन निर्माण ठेकेदार की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार नक्सलियों ने रांची से 65 किलोमीटर दूर खूंटी जिले में ठेकेदार केदार मुंडा की सलेहातू गांव से अपहरण कर उसकी हत्या कर दी। उसका शव नजदीक के जंगल से बरामद हुआ।
एक अन्य घटना में नक्सलियों ने गढ़वा जिले में स्थानीय नेता बर्धन काचू की हत्या कर दी। मंगलवार की रात उनका अपहरण बारकोल गांव से किया गया था। उनका शव बुधवार को बरामद हुआ।
नक्सलियों ने कई जिलों में कांग्रेस नेताओं को पार्टी छोड़ने के लिए कहा है। उन्होंने उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है।
बंद के पहले दिन राज्य में रेल और सड़क यातायात बाधित रहा। ट्रकों और लंबे रूट की बसों के नहीं चलने से राष्ट्रीय राजमार्ग वीरान नजर आया।
पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में बंद से सामान्य जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित रहा। कई जगह रेल व सड़क यातायात प्रभावित हुआ।
पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिरीक्षक (पश्चिमी रेंज) जुल्फिकार हसन ने आईएएनएस को बताया, "बंद का आंशिक असर केवल पश्चिम मिदनापुर, बांकुरा और पुरुलिया जिलों में रहा। कुछ जनजातीय इलाके प्रभावित रहे हैं। दुकानें और बाजार बंद रहे और वाहन नहीं चले।"
पश्चिम मिदनापुर के झारग्राम प्रखण्ड में बंद का पूर्ण असर दिखाई दिया। यह क्षेत्र नक्सली गतिविधियों का केंद्र बन कर उभरा है। बांकुरा जिले के खातरा प्रखण्ड में बंद का प्रभाव देखा गया। बांकुरा के पुलिस अधीक्षक विशाल गर्ग ने कहा, "वाहनों का आवागमन प्रभावित रहा और कुछ इलाकों की सड़कें वीरान रहीं।"
पुरुलिया जिले के पुलिस अधीक्षक राजेश यादव ने कहा कि जिले में सार्वजनिक वाहन तो सड़कों पर दिखाई दिए, लेकिन निजी बसें, कारें और ट्रक नहीं चले।
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हमले में 26 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने के एक दिन बाद नक्सलियों के दो दिवसीय बंद के कारण बस्तर क्षेत्र में आम जनजीवन प्रभावित हुआ।
छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गिरधारी नायक ने संवाददाताओं से कहा, "सुबह से शुरू हुए नक्सली बंद से बस्तर में हिंसा की कोई खबर नहीं मिली है लेकिन सड़क यातायात अवश्य प्रभावित हुआ है।"
उन्होंने कहा कि बस संचालकों ने नक्सलियों के हमलों के भय से हिंसा प्रभावित बस्तर क्षेत्र के नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों से हड़ताल की अवधि में वाहनों को हटा लिया है।
बिहार में 48 घंटे के बंद का पहला दिन शांतिपूर्ण ढंग से गुजरा। इस दौरान कहीं से किसी प्रकार के अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। बंद के मद्देनजर हालांकि राज्य भर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों औरंगाबाद, गया, जमुई, अरवल, जहानाबाद, रोहतास, मुंगेर तथा अरवल जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में इस बंद के पहले दिन व्यापक असर देखा गया। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश दुकानें बंद रहीं। पटना से लंबी दूरी तक चलने वाली बसें अवश्य चली परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन बिल्कुल ठप्प रहा।
बंद के कारण रेलवे द्वारा पलामू एक्सप्रेस समेत छह से ज्यादा ट्रेनों को एक जुलाई तक रद्द कर दिया गया है जबकि करीब 10 ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन कर दिया गया है। नक्सलियों ने हालांकि इस बंद में रेलवे को मुक्त रखने कर घोषणा की है।
राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक पी़ क़े ठाकुर ने बुधवार की शाम को बताया कि राज्य में बंद के दौरान अब तक कहीं से अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरी तरह चौकस है तथा रेल सेवाओं को बंद से अलग रखने के बावजूद पुलिस रेल मार्ग पर पूरी तरह सतर्कता बरत रही है।
उन्होंने कहा कि बंद के मद्देनजर आम लोगों की सुरक्षा के लिए एहतियातन कई कदम उठाए गए हैं तथा राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।
नक्सलियों द्वारा आयोजित दो दिवसीय बंद का उड़ीसा में मामूली असर देखा गया। पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन) संजीब मारिक ने आईएएनएस से कहा, "उड़ीसा-झारखण्ड सीमा से लगे इलाकों में वाहनों की संख्या कम दिखाई दी। इसके अलावा बंद का कहीं कोई असर नहीं है।"
मारिक ने कहा, "हर जगह जनजीवन सामान्य है। राज्य के किसी भी हिस्से से किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है।"
पूर्व तटीय रेलवे के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी एम.डी.साहू ने आईएएनएस को बताया, "रेल सेवाएं अप्रभावित हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications