घाटी में तनाव पर अमरनाथ यात्रियों के उत्साह में कमी नहीं (लीड-2)

1,272 तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे में 233 महिलाएं और 32 बच्चे शामिल हैं। तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को राज्य के पर्यटन मंत्री नवांग रिग्जिन जोरा ने रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, "तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।"

तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए जम्मू से लेकर कश्मीर स्थित गुफा तक पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

यह तीर्थ यात्रा 25 अगस्त को समाप्त होगी। लगभग पांच लाख लोगों के इस तीर्थयात्रा में शामिल होने की उम्मीद है। अमरनाथ स्थित भगवान शिव से संबंधित यह पवित्र गुफा समुद्र तल से 13,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

कुछ तीर्थयात्री ऐसे हैं, जो वर्षो से एक साथ तीर्थयात्रा में शामिल हो रहे हैं। यद्यपि तीर्थयात्री कश्मीर घाटी में जारी हिंसक हालात से चिंतित हैं, लेकिन फिर भी वे तीर्थयात्रा के प्रति दृढ़संकल्पित हैं।

एक तीर्थयात्री सतीश मंगोत्रा ने आईएएनएस को बताया, "यह आस्था का विषय है। कश्मीर में तनाव है सिर्फ इस वजह से मैं इस यात्रा को नहीं टाल सकता। मुझे पूरा विश्वास है कि बाबा भोले शंकर हम सभी की रक्षा करेंगे।"

अन्य तीर्थयात्रियों ने भी मंगोत्रा के ही शब्दों को दोहराया और सभी ने 'हर हर महादेव' का नारा लगाया।

अमृतसर की एक तीर्थयात्री अनिता देवी ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ यह देखने के लिए आई हैं कि बर्फ का शिवलिंग कैसा दिखता है। यह उनकी पहली अमरनाथ यात्रा है। इसके बारे में उन्होंने काफी कुछ सुन रखा था और उन्हें भरोसा है कि भगवान अमरनाथ की पूजा-अर्चना करने से उनका भाग्य संवर जाएगा।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जवाहर सुरंग से लेकर दक्षिण के आधार शिविर नुनवान और उत्तर के आधार शिविर बालतल तक पूरा रास्ता साफ कर दिया गया है और इस मार्ग पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है।"

भारतीय सेना को पहाड़ों की चोटियों पर सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के दोनों मार्गो की सुरक्षा करेगा। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और स्थानीय पुलिस आधार शिविरों और यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले पारगमन शिविरों की निगरानी करेंगे।

इस साल की अमरनाथ यात्रा पर नजर रखने के लिए बीएसएफ के करीब 3,000 जवान वहां पहुंच गए हैं। हिंसा के बाद जहां दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा में बुधवार सुबह अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया वहीं दक्षिणी कश्मीर के बिज्बेहारा और पहलगाम में भी कर्फ्यू जारी है।

अनंतनाग और पहलगाम तीर्थयात्रा के जम्मू-पहलगाम यात्रामार्ग में पड़ते हैं जबकि अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए उत्तरी कश्मीर के बालतल मार्ग को चुनने वाले तीर्थयात्रियों को दक्षिण के बिज्बेहारा, अवंतिपोर और पेम्पोर से होकर गुजरना होगा। श्रीनगर, गांदेरबल और कंगना भी यात्रा के मार्ग में ही हैं।

तीर्थयात्रियों लिए गांदेरबल जिले में मुफ्त रसोईं की सुविधा उल्ब्ध रहेगी जहां से उन्हें खाने-पीने की आपूिर्त की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक मुहम्मद अमीन ने कहा, "उत्तरी कश्मीर में 114 चिकित्सा शिविर और दक्षिणी कश्मीर में 11 चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए है। तीर्थयात्रियों के 21 एंबुलेंस भी उपलब्ध रहेंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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