इस वर्ष नक्सलियों ने 20 बार करवाया बिहार बंद
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इसके पूर्व 25 जून को नक्सलियों ने एक संदिग्ध नक्सली की गिरफ्तारी के विरोध में पूर्वी बिहार में बंद का एलान किया था। एक मुठभेड़ के विरोध में पुलिस के खिलाफ नक्सलियों ने 17 जून को 48 घंटे का बिहार-झारखण्ड बंद आयोजित किया था। नक्सलियों ने इससे पहले भी 14 जून को बिहार बंद का एलान कर आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था।
नक्सलियों ने कथित 'ऑपरेशन ग्रीनहंट' के खिलाफ 27 मई से तीन जून तक काला सप्ताह मनाया था। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवागमन ठप्प था। इसी तरह 18 मई से 48 घंटे तक संपूर्ण बिहार बंद बुलाया गया था। नक्सलियों ने छह मई को 48 घंटे तक तथा चार मई को 24 घंटे तक उत्तर बिहार में बंद बुलाया था।
अप्रैल महीना आम लोगों के लिए कुछ ठीक रहा। इस महीने में नक्सलियों ने सिर्फ 24 घंटे के बंद का एलान किया था। नक्सलियों ने पांच अप्रैल को बंद का एलान किया था। नक्सलियों ने मार्च महीने में 30, 22 और आठ मार्च को बंद का आह्वान किया गया था।
नक्सलियों ने फरवरी महीने में भी तीन बार पूरे बिहार में बंद आयोजित किया था जबकि सात फरवरी को केवल मगध प्रमंडल क्षेत्र में बंद की घोषणा की गई थी। इससे पहले जनवरी महीने में नक्सलियों ने तीन बार बिहार बंद की घोषणा की थी। इनमें से कुछ बंद बिहार के साथ अन्य राज्यों में भी आयोजित थे।
बंद के कारण आम लोगों के अलावा रेलवे को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। रेलवे के सूत्रों के अनुसार बिहार में एक दिन के बंद से रेलवे को 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ता है।
राज्य पुलिस का कहना है कि नक्सली केवल हताशा के कारण बंद की घोषणा करते हैं। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक पी़ क़े ठाकुर मानते हैं कि नक्सलियों के बंद के मद्देनजर पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी जाती है। बंद से राज्य को नुकसान उठाना ही पड़ता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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