नलिनी को वेल्लोर से चेन्नई जेल भेजा गया
नलिनी ने पुलिस महानिरीक्षक (जेल) के. श्याम सुंदर से शिकायत की थी कि वेल्लोर जेल के अधिकारी उसे खाने में जहर देने की कोशिश कर रहे हैं। उसने यह भी कहा था कि जेल के अधिकारी उसे अन्य कैदियों से बातचीत नहीं करने देते हैं। उसने मांग की थी कि उसे पुझाल जेल भेजा जाए।
नलिनी की शिकायत के बाद वेल्लोर जेल के अधिकारियों ने जेल में नलिनी के सेल की छानबीन की थी जहां उन्हें एक मोबाइल फोन और सिमकार्ड मिला था।
नलिनी ने मद्रास उच्च न्यायालय में तमिलनाडु सरकार द्वारा मार्च में उसकी सजा की अवधि पूरी होने से पहले रिहाई की मांग को नामंजूर किए जाने के खिलाफ अपील की थी।
सरकार ने रिहाई की मांग नामंजूर करने का फैसला वेल्लोर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाले जेल सलाहकार बोर्ड की अनुशंसा के आधार पर लिया था।
बोर्ड ने कहा था कि नलिनी में मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या पर माफी मांगने से इंकार कर दिया था।
लिट्टे द्वारा रची गई राजीव गांधी की हत्या की साजिश में नलिनी भी शामिल थी। लिट्टे ने 1987 में श्रीलंका में शांति सेना भेजने के राजीव गांधी सरकार के फैसले के विरोध में उनकी हत्या की साजिश रची थी।
नलिनी को 16 लोगों की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
राजीव गांधी की पत्नी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद नलिनी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया गया था। पिछले साल सितंबर में नलिनी ने अपील दायर की थी कि उसकी सजा के 14 साल पूरे होने से उसे रिहा किया जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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