दो बच्चों की मौत से माता-पिता की संवेदना पर सवाल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छवि वैसे तो पंचायतों के फरमान व प्रेमी-प्रेमिका के दुश्मन के रूप में बन रही है, लेकिन वर्तमान में अपनी औलाद पर मां-बाप ही जुल्म करते नजर आ रहे हैं। बीते मंगलवार को सहारनपुर की नूर बस्ती में बच्चे सानिया (तीन) व शादाब (ढाई माह) की हत्या दूध में जहर मिलाकर की गई। इस मामले में बच्चों की मां इमराना शक के घेरे में है।

यह मामला सुलझा भी नहीं था कि बुलंदशहर जनपद के खुर्जा कस्बे के मोहल्ला खीरखाती निवासी जाकिर की पत्नी हसीना के बीच हुए मामूली झगड़े की सजा जाकिर ने अपनी दो मासूम बच्चियों इंशा (छह) व सना (पांच) को जहर देकर दी। इंशा की मौत हो गई, जबकि दूसरी बच्ची की हालत गंभीर है। जाकिर की पत्नी ने मायके से आने को मना कर दिया था, लेकिन बच्चियों को पिता के साथ भेज दिया था, जिन्हें पिता ने रास्ते में जहर दे दिया।

बिजनौर जनपद में भी माता-पिता की एक नई भूमिका सामने आई। डेढ़ साल की समीक्षा व तीन साल के तरुण का कसूर इतना था कि उसके माता-पिता कई वर्षो से अलग रह रहे थे। दोनों बच्चे ननिहाल में थे। पति ने पत्नी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। शुक्रवार को दोनों न्यायालय में तारीख पर आए। बच्चों को साथ रखने पर दोनों में जमकर विवाद हुआ तो दोनों ही बच्चों को लावारिस छोड़कर कचहरी से चले गए।

मासूम बच्चों के प्रति बिगड़ती इस मानवीय सोच के बारे में प्रसिद्ध समाजशास्त्री डा. गीतांजलि वर्मा का कहना है कि पति-पत्नी के बीच संबंधों में विश्वास की कमी इसका परिणाम है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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