भोपाल गैस कांड पर माफी मांगे कांग्रेस : गडकरी (राउंडअप)
बिहार की ऐतिहासिक नगरी पटना में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के पहले दिन अपने अध्यक्षीय भाषण में गडकरी ने भोपाल गैस त्रासदी के साथ महंगाई, विदेश नीति, आर्थिक नीति, आतंकवाद और नक्सलवाद के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने इस अवसर पर बिहार सरकार के कामकाज की जमकर तारीफ भी की।
भोपाल गैस त्रासदी पर कांग्रेस खामोश क्यों :
इस मामले पर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए गडकरी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर खामोश क्यों है। उसे देश से माफी मांगनी चाहिए। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह से इस मामले में चुप्पी तोड़ने की मांग करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सिंह बताएं कि एंडरसन को क्यों और कैसे छोड़ा गया। केंद्र की संप्रग सरकार को उन्होंने यूनियन कार्बाइड प्रोटेक्शन एजेंसी करार दिया। पार्टी इसके लिए देश के कोने-कोने में आवाज उठाएगी।
गडकरी ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी का फैसला हमारी न्यायिक प्रणाली द्वारा किया गया क्रूर मजाक है। भाजपा मांग करती है कि सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए और फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहे।
भोपाल इस बात की मिसाल है कि किस तरह हमारी न्यायिक प्रणाली की अंतर्निहित कमजोरी के कारण दोषी बरी हो जाते हैं। भोपाल ने एक बार फिर समूचे राष्ट्र के सम्मुख दोहराया है कि कैसे कांग्रेसी शासक समय-समय पर अपने निजी और राजनीतिक हितों के लिए लोगों के हितों से समझौता करते रहे हैं।
बिहार सरकार के कामकाज की तारीफों के पुल :
अपने संबोधन में बिहार की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासतों का जिक्र करते हुए गडकरी ने बिहार की भाजपा-जद (यू) गठबंधन सरकार की तारीफों के जमकर पुल बांधे। उन्होंने कहा कि बिहार में पहली बार कोई सरकार जनाकांक्षाओं के अनुरूप काम कर रही है और वांछित परिणाम दे रही है।
बिहार के पिछले शासकों ने राज्य के लोगों में शìमदगी और हीनभावना पैदा करने के अलावा कुछ नहीं किया। दुनिया में कई लोग बिहार को केवल 'बीमारू' के पहले अक्षर के रूप में जानते थे। राजग शासन में नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी के नेतृत्व में बीमारू बिहार 'जुझारू' बिहार में परिवर्तित हो गया है। मैं यहां के राजग नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं जिसने हर बिहारी में गर्व की भावना भर दी है। बिहार ने 11 प्रतिशत की आश्चर्यजनक विकास दर हासिल कर एक मिसाल कायम की है।
संप्रग पर साधा निशाना :
कांग्रेसनीत केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार (संप्रग) को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि संप्रग-2 ने सत्ता में एक वर्ष पूरा कर लिया है। लेकिन उसका यह पहला वर्ष विफलताओं के नाम है।
कांग्रेस ने 100 दिनों में जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर लगाम लगाने का वादा किया था, लेकिन कीमतें शत-प्रतिशत बढ़ गईं। प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि वे विकास दर को दो अंकों में पहुंचा देंगे। विकास दर दो अंकों में तो नहीं पहुंची, लेकिन मुद्रास्फीति दो अंकों में जरूर पहुंच गई।
आतंकवाद और नक्सलवाद सहित देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार के रवैए की जहां उन्होंने आलोचना की वहीं आर्थिक व विदेश नीति के मोर्चे पर उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस पर दलितों के साथ विश्वासघात करने का भी उन्होंने आरोप लगाया।
सीबीआई डराने का हथियार बन गई है :
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के राजनीतिक इस्तेमाल के लिए कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुए गडकरी ने उसे कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्टिमिडेशन करार दिया।
उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र आंतरिक सुरक्षा के खतरों का सामना कर रहा है तब सरकार सीबीआई को अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए काम करने को बाध्य कर रही है। सीबीआई डराने का हथियार बन गई है।
भोपाल त्रासदी के संदर्भ में इसके एक अधिकारी द्वारा किए गए ताजे रहस्योद्घाटन ने हमारे इस भय की पुष्टि की है कि कांग्रेस इस रणनीति को अपनाकर अपने विरोधियों को झुकाती है या अपने परिचितों- क्वोत्रोकी और एंडरसन को कानून की पकड़ से आजाद कराती है। इससे सिद्घ होता है कि उनकी प्रतिबद्घता भारत के लोगों के प्रति नहीं हैं। भाजपा सीबीआई के दुरुपयोग की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की जोरदार मांग करती है।
नक्सलवाद पर प्रस्ताव और चीन के अतिक्रमण पर चिंता :
बैठक के पहले दिन नक्सलवाद पर पार्टी की ओर से एक प्रस्ताव लाया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार को नक्सली आंदोलन का उद्देय समझना होगा। इस मसले पर केंद्र व राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता जताते हुए भाजपा ने कहा कि समूचे राष्ट्र को एक स्वर में आवाज उठाने की जरुरत है।
चीन के भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण के मुद्दे पर पार्टी नेताओं की ओर से एक प्रस्तुति दी गई। संगठनात्मक विषयों पर राज्यवार रिपोर्टिंग भी हुई। इसके अलावा बैठक में प्रशिक्षण, सुराज व अंत्योदय पर मंथन भी हुआ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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