सर्वोच्च न्यायालय की वजह से गैस कांड में सजा कम हुई:मोइली
आरोपियों पर पहले लगाए गए अभियोग में अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान था।
मोइली ने यहां संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) गैस त्रासदी मामले में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलाना चाहता था जिसमें आरोपियों को अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती थी और जुर्माने का भी प्रावधान था।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को गैर इरादतन हत्या की धारा की बजाय लापरवाही की धारा के तहत कर दिया।
इस धारा के तहत अधिकतम दो साल की सजा अथवा जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।
मोइली ने कहा कि ऐसे कानून की जरूरत है जिसके जरिये भोपाल गैस त्रासदी जैसी आपदाओं के लिए जिम्मेदारी तय की जा सके।
उन्होंने कहा, "हमारी अदालतें काफी रुढ़िवादी हैं। इसलिए हम कानून की नई धाराओं पर विचार कर रहे हैं जिससे इस तरह की आपदा से निपटा जा सके।"
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यूनियन कार्बाइड प्रमुख वारेन एंडरसन को न्याय के कटघरे तक लाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ मामला अभी बंद नहीं हुआ है।
एंडरसन की पत्नी की इस टिप्पणी पर कि वह काफी बुजुर्ग हैं और यात्रा नहीं कर सकते, मोइली ने कहा, "कानून की नजर में सभी बराबर हैं और उम्र मायने नहीं रखती।"
एंडरसन अब 89 साल के हैं। उन्हें दिसंबर 1984 में भोपाल गैस त्रासदी में गिरफ्तार किए जाने के कुछ देर बाद ही रिहा कर दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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