अप्रैल में देश का निर्यात 36 प्रतिशत बढ़ा (लीड-1)
आर्थिक मंदी के दौरान निर्यात में 13 महीने तक चली गिरावट के बाद अप्रैल में लगातार छठवे महीने में यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
निर्यात में हुई यह बढ़ोतरी गहने, हीरे-जवाहरात, कपड़ा और पेट्रोलियम व इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी के चलते हुई है। लेकिन भारत के निर्यात अभी भी दो साल पहले की तुलना में कम बने हुए हैं।
व्यापार क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि निर्यात में यह बढ़ोत्तरी कमजोर आधार वर्ष के कारण नजर आ रही है। तुलना की जा रही अवधि में भी आंकडे कम होने के कारण निर्यात में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है।
वाणिज्य विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि यूरोप में चल रहे मौजूदा ऋण संकट के चलते निर्यात की विकास दर घटने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा, "यदि यूरोप में ऋण संकट और गहराता है तो यह समस्या बन सकता है, हमारे निर्यातों के लिए यूरोप बड़ा बाजार है।"
भारतीय निर्यात संघ (एफआईईओ) के महानिदेशक अजय सहाय कहते हैं कि सरकार को यूरोपीय संकट पर बारीकी से नजर रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाना चाहिए।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2009-10 में देश का निर्यात 4.7 प्रतिशत घटा है, यह गिरावट आर्थिक मंदी के दौरान मांग में कमी के कारण हुई थी।
सरकार ने वर्ष 2010-11 में निर्यात में 15 प्रतिशत की दर से वद्धि का लक्ष्य रखा है।
अप्रैल महीने में देश के आयात में 43.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, इस दौरान आयात बढ़कर 27.3 अरब डॉलर का हो गया है। पिछले साल की इसी अवधि में 19 अरब डॉलर का आयात हुआ था।
इस दौरान सरकार का व्यापार घाटा पिछले साल के अप्रैल महीने के 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 10.4 अरब डॉलर हो गया है।
अप्रैल में पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में 70.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल के अप्रैल महीने के 4.7 अरब डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात की तुलना में इस बार आठ अरब डॉलर का आयात किया गया है। इस दौरान गैर तेल आयातों में 34.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल 2009 के 14.3 अरब डॉलर की तुलना में यह बढ़कर 19.2 अरब डॉलर हो गया है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2010-11 में 200 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है और 2014 तक सरकार निर्यात को दोगुना करना चाहती है।
अजय सहाय ने कहा, "यदि (यूरोपीय) संकट ग्रीक से आगे नहीं बढ़ता है तो हम 200 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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