जंक फूड को बढ़ावा देते हैं टेलीविजन विज्ञापन
शोधकर्ताओं ने पाया कि विज्ञापित भोजन की एक 2,000 कैलोरी की खुराक में शर्करा आवश्यकता से 25 गुना अधिक, वसा आवश्यकता से 20 गुना अधिक होता है लेकिन सब्जियों, डेरी उत्पादों और फलों की मात्रा जरूरत से केवल आधी ही मिल पाती है।
वास्तव में इस तरह के भोजन से शरीर में शर्करा और वसा की मात्रा औसत से कहीं अधिक पहुंच जाती है। असल में शर्करा की मात्रा प्रतिदिन की अनुशंसित मात्रा से तीन गुना और वसा की मात्रा ढाई गुना अधिक मिलती है।
'आर्मस्ट्रांग अटलांटिक स्टेट युनीवर्सिटी' (एएएसयू) के शोधकर्ता माइकल मिंक कहते हैं, "अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि टेलीविजन पर विज्ञापित भोजन लेने से बीमारियों को बढ़ाने वाले पदार्थ (संतृप्त वसा, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम) शरीर में अधिक मात्रा में पहुंच जाते हैं और बीमारी से बचाने वाले पोषक तत्वों (रेशा, विटामिन ए, ई और डी, कैल्शियम और पोटैशियम) की कमी हो जाती है।"
शोधकर्ताओं ने 2004 में 28 दिन तक टेलीविजन पर प्रसारित विज्ञापित भोजन का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने प्रत्येक भोज्य पदार्थ में पोषक तत्वों की उपस्थिति का आकलन किया।
इनमें से प्रत्येक भोजन में शर्करा, वसा, मांस की अत्यधिक मात्रा थी जबकि डेरी उत्पादों, फलों और सब्जियों की कमी थी। इसी तरह इनसे प्रोटीन, सेलीनियम, सोडियम, नियासिन, पूर्ण वसा, संतृप्त वसा, थियामिन और कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा मिल रही थी जबकि इनमें आयरन, फोसफोरस, विटामिन ए, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, विटामिन ई, मैग्नीशियम, कॉपर, पोटैशियम, पैंटोथीनिक एसिड, रेशे और विटामिन डी की कमी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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