मानवाधिकार उल्लंघन रोके बिना बातचीत संभव नहीं: मीरवाइज

नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 30 अप्रैल को हुई कथित फर्जी गोलाबारी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मीरवाइज ने उनकी पार्टी के राजबाग मुख्यालय पर सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मानवाधिकारों का उल्लंघन और वार्ता प्रक्रिया एक साथ नहीं चल सकते।

इस गोलाबारी में कथित तौर पर तीन ग्रामीणों को अलगाववादी बताकर उनकी हत्या कर दी गई थी।

मीरवाइज ने कहा, "यदि हमें लोगों के भविष्य पर चर्चा करनी है तो यह कैसे संभव होगा जबकि यहां उन्हीं लोगों का जीवन खतरे में है।"

उल्लेखनीय है कि राज्य में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 30 अप्रैल को तीन ग्रामीणों शहजाद अहमद खान, रियाज अहमद लोन और मुहम्मद शफी लोन को कथित तौर पर फंसाकर और उन्हें अलगाववादी बताकर उनकी हत्या कर दी गई थी।

इन हत्याओं के लिए भारतीय सेना के एक मेजर और क्षेत्रीय सेना के एक सिपाही सहित चार अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

मीरवाइज ने पत्रकारों से कहा, "हम फर्जी मुठभेड़ों के माध्यम से निर्दोष लोगों की हत्याएं बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं। तथ्यों को स्थापित करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय समिति को इन फर्जी मुठभेड़ों की जांच करनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "हमें भारतीय जांच एजेंसियों और स्थानीय पुलिस पर विश्वास नहीं है। हमने देखा है कि शोपियां में दोहरी हत्या और बलात्कार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने किस तरह जांच की थी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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