फर्जी मुठभेड़ मामले में कश्मीर में संघर्ष, 10 घायल (राउंडअप)
श्रीनगर/नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। उत्तरी कश्मीर के नाडिहाल गांव में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए संघर्ष में तीन पुलिसकर्मियों सहित 10 लोग घायल हो गए। इस बीच यहां 30 अप्रैल को फर्जी मुठभेड़ में मारे गए तीनों नागरिकों को शनिवार को दफना दिया गया। इस फर्जी मुठभेड़ के मामले में सेना के एक मेजर और चार अन्य को निरुद्ध किया गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यहां कहा, "प्रदर्शनकारी पुलिस कर्मियों पर पथराव करते हुए सड़क पर उतर आए और उन्होंने उत्तरी कश्मीर के सोपोर जिले में नाडिहाल गांव में राजमार्ग को जाम कर दिया।"
अधिकारी ने बताया, "पुलिस ने बेकाबू प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।"
प्रदर्शनकारियों ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला और श्रीनगर के हाब्बा काडाल इलाके में भी पुलिस पर पथराव किया।
इस बीच सेना के एक मेजर और चार अन्य लोगों को तीनों नागरिकों की हत्या के मामले में निरुद्ध किया गया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है तो रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने इसकी जांच का भरोसा दिलाया है।
एंटनी ने कहा, "कश्मीर सरकार फर्जी मुठभेड़ के इस मामले में पहले से जांच करा रही है। हम जांच में सहयोग करेंगे। सेना भी गंभीरता के साथ मामले की जांच कर रही है। इसमें किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।"
उत्तरी कश्मीर के राफियाबाद के नादिहाल के रहने वाले तीनों नागरिकों शहजाद अहमद खान, रियाज अहमद लोन और मुहम्मद शफी लोन के शवों को कुपवाड़ा जिले के कलारूस गांव स्थित कब्रिस्तान से निकाला गया और मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में परिजनों ने उनकी पहचान की।
इस मामले में एक पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी बशीर अहमद और उसके सहयोगी फयाद अहमद को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रांतीय सेना के जवान अब्बास हुसैन शाह को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया। उसे इस षडयंत्र का सबसे बड़ा सूत्रधार माना जा रहा है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "लंबी पूछताछ के दौरान पूरे षडयंत्र का खुलासा हुआ। अब्बास हुसैन शाह इस षडयंत्र का सूत्रधार है। उसने सेना के एक मेजर और अन्य के साथ मिलकर तीनों नागरिकों की हत्या की साजिश रची थी।"
अधिकारी ने बताया कि तीनों से यह वादा किया था कि यदि वे माशिल सेक्टर में सेना के लिए मजदूरी का काम करेंगे तो उन्हें 2000 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे।
अधिकारी ने बताया कि जब तीनों के शव दफनाने के लिए सौंपे गए थे और उन्हें घुसपैठिया बताया गया था तभी उन्हें मुठभेड़ के फर्जी होने का संदेह हो गया था। "क्योंकि सभी गोलियां तीनों के सिर में लगी थी और मुठभेड़ में ऐसा संभव नहीं होता। तीनों ने गर्मी के मौसम वाले कपड़े पहन रखे थे। घुसपैठियों के लिए बर्फबारी वाले इलाकों से इन कपड़ों में घुसपैठ करना संभव नहीं होता।"
ज्ञात हो कि सेना की ओर से 30 अप्रैल को यह दावा किया गया था कि उसने नियंत्रण रेखा पर माशिल सेक्टर में घुसपैठ की एक कोशिश नाकाम की है, जिसमें तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया है। सेना की ओर से यह दावा भी किया गया था कि उसने इन घुसपैठियों से भारी मात्रा में हथियार व गोला बारूद बरामद किया है।
एंटनी ने इस मामले में अपनी टिप्पणी करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में फर्जी मुठभेड़ में निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
एंटनी ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा कि यदि कोई इसमें दोषी पाया गया तो उसे कड़ी सजा मिलेगी।
उधर, माकपा ने इस घटना पर आश्चर्य जताते हुए केंद्र सरकार से इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
माकपा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "जम्मू एवं कश्मीर में सेना की एक टुकड़ी द्वारा तीन कश्मीरी युवकों की कथित तौर पर की गई हत्या पर माकपा गहरा दुख जताती है।"
बयान में कहा गया, "केंद्र सरकार को ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए।"
दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के कश्मीर दौरे के विरोध में कट्टरपंथी अलगावादी नेता सैयद अली गिलानी की ओर एक दिन के बंद आह्वान किया गया था। इसके कारण घाटी में शनिवार को आम जनजीवन प्रभावित हुआ।
गांधी ने जम्मू में एक जनजातीय सांस्कृतिक केंद्र का उद्घाटन किया और गुर्जर समुदाय द्वारा आयोजित एक समारोह को संबोधित किया। उन्होंने इसके पहले श्रीनगर का अपना दौरा रद्द कर दिया था।
दुकानें, अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान बंद रहे और सार्वजनिक वाहन सड़कों से नदारद रहे तथा सरकारी कार्यालयों और बैंकों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही।
अधिकारियों ने पुराने शहर के संवेदनशील पांच पुलिस थाना क्षेत्रों- खनयार, रैनावारी, नौहाटा, महाराजगंज और साफा कदल में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान तैनात किया था।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया,"नागरिकों और संपत्ति को कोई नुकसान न हो इसके बाबत ये कदम उठाए गए थे।"
अलगाववादियों के बंद के आह्वान के चलते गांदरबल के जिला मुख्यालय, बंदीपोरा, कुपवाड़ा, बड़गाम, बारामूला, पुलवामा, शोपियां और कुलगाम में भी जनजीवन प्रभावित रहा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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