रेल दुर्घटना : मृतकों की संख्या 131 हुई (लीड-3)
पुलिस महानिदेशक भूपिंदर सिंह ने बताया कि अब तक 131 शव बरामद हुए हैं। अभी कुछ और शव बरामद हो सकते हैं। राहतकर्मी ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस के बुरी तरह क्षतिग्रस्त द्वितीय श्रेणी के स्लीपर कोच एस 5 में प्रवेश में सफल हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि इस हादसे में 146 यात्री घायल हैं, जिनमें से 38 की हालत गंभीर है।
सिंह ने विस्तृत जानकारी न देते हुए सिर्फ इतना कहा कि प्राप्त सबूतों से पता चलता है कि इस भीषण दुर्घटना को अंजाम देने में निश्चत रूप से नक्सलियों का हाथ है।
उन्होंने बताया कि संदिग्ध नक्सलियों ने सरडीहा और खेमासुली रेलवे स्टेशन के बीच डेढ़ फीट रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया था, जिससे शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे यह हादसा हुआ। उस समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे।
इस रेलगाड़ी के पांच कोच दूसरे ट्रैक पर जा गिरे। जब तक यात्री उनमें से निकल पाते, एक मालगाड़ी इन कोचों पर चढ़ गई, जिससे काफी लोग कुचले गए।
पुलिस ने दुर्घटनास्थल से नक्सल समर्थित पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण समिति (पीसीएपीए) के दो पोस्टर बरामद किए हैं। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस त्रासदी में नक्सलियों का हाथ है।
इस बीच बहुत से शवों की शिनाख्त में हो रही परेशानी के मद्देनजर उनकी डीएनए जांच कराने का फैसला किया गया है।
पुलिस महानिदेशक भूपिंदर सिंह ने आईएएनएस को बताया कि मौके पर बचावकर्मी, चिकित्सा दल, रेलवे के अधिकारी, पुलिस कर्मी और अर्धसैनिक बल यहां बचाव कार्य में जुटे हैं। यह हादसा गुरुवार रात लगभग 1.30 बजे हुआ था।
एक बचावकर्मी ने बताया, "शव अब सड़ने शुरू हो गए हैं। हादसे को 36 घंटे से ज्यादा हो गए हैं।"
उधर, दुर्घटना वाले रेल मार्ग पर सेवाएं अब तक बाधित हैं।
इस बीच इस भीषण ट्रेन दुर्घटना में बचे यात्रियों और उनके रिश्तेदारों को वापस लाने के लिए एक विशेष रेलगाड़ी मुबंई से रवाना की गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
प्रवक्ता ने बताया, "राहत ट्रेन रात लगभग नौ बजे कुर्ला लोकमान्य तिलक टर्मिनल पहुंचेगी।"
महाराष्ट्र के पीड़ितों का विवरण अभी तक नहीं मिल सका है। प्रवक्ता ने बताया, "दुर्घटनास्थल पर बचाव कार्य चल रहा है। महाराष्ट्र के पीड़ितों और बचे हुए लोगों के बारे में अनुमान लगाना अभी कठिन है।"
इस बीच रेल दुर्घटना के मद्देनजर चलाए जा रहे राहत कार्यो को लेकर रेल मंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार के बीच अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी आरंभ हो गया है।
राज्य सरकार ने आरोप लगाया है कि रेल मंत्रालय के असहयोग के चलते बचाव व राहत कार्य प्रभावित हुआ।
उल्लेखनीय है कि हावड़ा-कुर्ला ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस का इंजन और 12 डिब्बे सरडीहा और खेमासुली रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी से उतर गए थे और फिर रेलगाड़ी एक मालगाड़ी से जा टकराई थी। इस हादसे में अब तक 98 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
इस वर्ष नक्सलियों द्वारा इंजाम दिए जाने वाली यह तीसरी बड़ी दुर्घटना है। इससे पहले नक्सलियों ने छह अप्रैल को छत्तीसगढ़ में 76 सुरक्षाकर्मियों की जान ली थी।
विस्फोट की आवाज सुनी थी : चालक
पश्चिम बंगाल के झारग्राम में गुरुवार रात हादसे का शिकार हुई ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के चालक ने शनिवार को पुलिस में दर्ज करवाई शिकायत में कहा कि ट्रेन के डिब्बों के पटरी से उतरने से पहले उन्होंने विस्फोट की आवाज सुनी थी और झटका महसूस किया था। इस हादसे में कम से कम 95 लोगों की मौत हो गई।
चालक बी. के. दास ने 'अज्ञात उपद्रवकारियों' के विरुद्ध झारग्राम राजकीय रेलवे पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया। चालक ने दावा किया कि उन्होंने पहले इंजन के नीचे विस्फोट की आवाज सुनी, फिर धुंआ छा गया और डिब्बे पटरी से उतर गए।
चालक ने कहा कि उन्हें झटका भी महसूस हुआ था और 13 बोगियों के पटरी से उतरने से पहले उन्होंने ब्रेक भी लगाई थी। दास ने कहा कि उसी समय उन्होंने और उनके सहयोगी चालक निरंजन सिंह ने विपरीत दिशा से एक रेलगाड़ी को दूसरे ट्रैक पर आते देखा। उस रेलगाड़ी के चालक द्वारा उसे रोकने की पूरी कोशिश किए जाने के बावजूद वह रेलगाड़ी ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस की पटरी से उतर चुकी बोगियों से टकरा गई।
चालक की शिकायत रेलवे अधिनियम की धारा 150 एवं धारा 151 के तहत दर्ज की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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