'मेघालय में आतंक के साए में नेपाली'
भारतीय सेना में नौ साल तक अपनी सेवा देने के बाद मेघालय की राजधानी शिलांग में रह रहे तिल बहादुर बिश्वकर्मा ने बताया, "नेपाली रात को सो नहीं पा रहे हैं। कई जगहों पर लोग टोली बनाकर रात में अपने परिवार की रक्षा कर रहे हैं। जो यहां से जाना चाहते हैं उन्हें डर के मारे असम के गोपनीय रास्ते से निकलना पड़ रहा है।"
'माइग्रेंट नेपालीज एसोसिएशन इंडिया' के सचिव बिश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री मुकुल संगमा को इस मामले में एक ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में उन्होंने नेपाली आबादी के पूर्ण उन्मूलन के अंतिम लक्ष्य के साथ नेपाली लोगों को आतंकित किए जाने की कोशिशों को रोकने की मांग की है।
मेघालय में हालांकि काम करने वाले नेपालियों का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन बिश्वकर्मा के मुतबिक पांच से आठ लाख के बीच नेपाली नागरिक गारो, खासी और जयंतिया क्षेत्रों में स्थित कोयला खदानों में काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस महीने, जब से नेपालियों पर हमले शुरू हुए हैं, लगभग 70 प्रतिशत खनन कर्मी यहां से पलायन की तैयारी शुरू कर चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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