रेल दुर्घटना : मृतकों की संख्या 98 हुई, शिनाख्त के लिए डीएनए जांच होगी (लीड-2)

अधिकारियों का कहना है कि हादसे में मरने वालों संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि 36 घंटों बाद भी दुर्घटनाग्रस्त ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस के एस 5 कोच में बचावकर्मी नहीं पहुंचे हैं। यह डिब्बा हादसे के बाद न सिर्फ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था बल्कि इसमें आग भी लग गई थी।

राज्य के नागरिक सुरक्षा मंत्री श्रीकुमार मुखर्जी ने यहां संवाददाताओं को बताया, "यह डिब्बा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। मुझे यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि इस डिब्बे में किसी में किसी जीवित बचे होने की संभावना बेहद कम है।"

मुखर्जी ने कहा, "अब तक 98 शव बरामद किए जा चुके हैं। एस 5 कोच से शवों को निकाले जाने के बाद मरने वालों की संख्या और ज्यादा हो सकती है।"

राज्य के पुलिस महानिदेशक भूपिंदर सिंह ने आईएएनएस को बताया कि हादसे में 167 लोग घायल हुए हैं। मौके पर बचावकर्मी, चिकित्सा दल, रेलवे के अधिकारी, पुलिस कर्मी और अर्धसैनिक बल यहां बचाव कार्य में जुटे हैं। यह हादसा गुरुवार रात लगभग 1.30 बजे हुआ था।

एक बचावकर्मी ने बताया, "शव अब सड़ने शुरू हो गए हैं। हादसे को 36 घंटे से ज्यादा हो गए हैं।"

इस बीच शवों की शिनाख्त में हो रही परेशानी को देखते हुए अधिकारियों ने शवों को पीड़ित परिवारों को सौंपने से पहले उनकी डीएनए जांच कराने का फैसला किया है। मुखर्जी ने बताया कि शनिवार को मिदनापुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शवों के रक्त नमूने लिए जाएंगे। सभी शवों को इसी अस्पताल में रखा गया है।

मुखर्जी ने कहा, "हम रविवार को सभी शवों के नमूनों को कोलकाता की केंद्रीय फारेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) भेजेंगे। " मंत्री ने कहा कि अब तक बरामद किए गए 98 शवों में से आधे शवों की शिनाख्त कर ली गई है।

मुखर्जी ने उन लोगों से सीएफएसएल में अपने रक्त नमूने देने की अपील की जो अपने दुर्घटनाग्रस्त रेलगाड़ी सवार के अपने परिजनों को ढ़ूढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "आधे शवों की पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा है।"

उधर, दुर्घटना वाले रेल मार्ग पर सेवाएं अब तक बाधित हैं।

इस बीच इस भीषण ट्रेन दुर्घटना में बचे यात्रियों और उनके रिश्तेदारों को वापस लाने के लिए एक विशेष रेलगाड़ी मुबंई से रवाना की गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।

प्रवक्ता ने बताया, "राहत ट्रेन रात लगभग नौ बजे कुर्ला लोकमान्य तिलक टर्मिनल पहुंचेगी।"

महाराष्ट्र के पीड़ितों का विवरण अभी तक नहीं मिल सका है। प्रवक्ता ने बताया, "दुर्घटनास्थल पर बचाव कार्य चल रहा है। महाराष्ट्र के पीड़ितों और बचे हुए लोगों के बारे में अनुमान लगाना अभी कठिन है।"

इस बीच रेल दुर्घटना के मद्देनजर चलाए जा रहे राहत कार्यो को लेकर रेल मंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार के बीच अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी आरंभ हो गया है।

राज्य सरकार ने आरोप लगाया है कि रेल मंत्रालय के असहयोग के चलते बचाव व राहत कार्य प्रभावित हुआ। मुखर्जी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "दुर्घटनास्थल पर राहत व बचाव कार्य असहयोग के कारण प्रभावित हुआ। बार-बार के आग्रह के बावजूद हमें रेलवे की तरफ से मृतकों की कोई सूची नहीं मिली है।"

उन्होंने कहा कि शनिवार सुबह उनकी दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। "अधिकारियों ने हमें मृतकों की सूची सौंपने का वादा किया है।"

उल्लेखनीय है कि हावड़ा-कुर्ला ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस का इंजन और 12 डिब्बे सरडीहा और खेमासुली रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी से उतर गए थे और फिर रेलगाड़ी एक मालगाड़ी से जा टकराई थी। इस हादसे में अब तक 98 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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