बालगृह की अनिमितताओं की न्यायिक जांच कराने की सिफारिश

लखनऊ, 29 मई (आईएएनएस)। लखनऊ स्थित अनाथ बच्चों के आश्रय स्थल राजकीय बालगृह की पड़ताल में सामने आई वित्तीय अनिमितताओं और गड़बड़ियों के मामले में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने मुख्यमंत्री मायावती को भेजी अपनी रिपोर्ट में मामले में न्यायिक जांच कराने की सिफारिश की है।

बाल गृह की जांच करने वाली सीडब्ल्यूसी के सदस्य श्याम कुमार ने यहां शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि हमारी पड़ताल में जो गड़बड़ियां और अनिमितताएं सामने आई हैं, वे तो शुरुआत भर हैं। हमारा मानना है कि अधिकारियों द्वारा बहुत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है।

कुमार ने आईएएनएस से कहा कि बालगृह के अधिकारियों पर जिस तरह भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं, उन्हें देखते हुए हमें लगा कि विभागीय जांच में उनका पूरा भ्रष्टाचार बेपर्दा नहीं होगा। इसलिए हमने मुख्यमंत्री को सौंपी अपनी रिपोर्ट में न्यायिक जांच की सिफारिश की।

सीडब्ल्यूसी ने बुधवार शाम प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बालगृह में बच्चों को बुरी तरह से रखे जाने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए बालगृह की जांच की थी जिसमें गंभीर अनिमितताएं पाई गई थीं।

अनियिमतताओं का आलम यह है कि एक ही बिस्तर पर तकरीबन 10 से ज्यादा बच्चों को सुलाया जाता है। बच्चों के कमरे में पंखे नहीं हैं और वहां दुर्गंध आती रहती है।

इसके अलावा लोगों द्वारा बच्चों के लिए दान में दिए गए नए कपड़े, खिलौने और कंबल जैसी अन्य वस्तुएं बच्चों को न देकर पैकेटों में ही बंद पड़ी थीं। दान में मिले सामान का लेखा-जोखा न मिले इसके लिए दान रजिस्टर भी गायब कर दिया गया था।

अधिकारियों के मुताबिक बच्चों की सुविधाओं के लिए बालगृह को दिए गए टीवी, फ्रिज, डीवीडी प्लेयर या तो अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल में लाए जा रहे थे या गायब थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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