देश चाहता है नक्सलियों के खिलाफ हो सेना का इस्तेमाल
मतलब साफ है कि नक्सलियों ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि वो हमारे सुरक्षा बलों पर भारी पड़े हैं। आखिर कब तक हम इन नक्सलियों की त्रासदी का शिकार होते रहेंगे, वारदातों का होना लगातार जारी है, मासूम लोग मर रहे हैं और सरकार मुआवजों का ऐलान कर के चुप हो जाती हैं, लेकिन सरकार कोई भी समाधान इस समस्या का निकाल नहीं पा रही है। बैठकों का दौर जारी हैं, चिंदंबरम ने नक्सलियों से लड़ने की जिम्मेदारी खुद ले ली है लेकिन फिर भी कोई ठोस कदम उठाए नहीं गए हैं। हम अभी दंतेवाड़ा के घावों से उबर भी नहीं पाये थे कि पं, बंगाल की घटना ने हमारी चोट और दर्द को फिर से हरा कर दिया। आखिर सरकार से चूक कहां हो रही है ?
देखें- दैट्स हिन्दी पर इस मुद्दे पर पोल के परिणाम
इन्हीं सवालों के मद्देनजर हमारी ' दैट्स हिन्दी' की टीम ने एक सर्वे कराया जिसमें हमने देश की जनता से सवाल किया था कि क्या नक्सलियों के खात्मे के लिए हमें सेना की मदद ले लेनी चाहिए? आपको जानकर हैरत होगी कि जनता का जवाब आया कि हां हमें अब नक्सलियों के खात्में के लिए सेना की मदद लेनी चाहिए। देश के 72 प्रतिशत लोगों का मत है कि सरकार को अब नक्सलियों के अंत के लिए भारतीय सेना की मदद ले लेनी चाहिए। इससे साबित होता है कि भारत की आम जनता का भरोसा देश की सुरक्षा बलों से उठ गया है और वो जल्द से जल्द इस आतंक का खात्मा चाहती हैं, और शायद ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मरता तो एक आम आदमी ही है। देश की सरकार चलाने वाले हमारे पुरोधा केवल एसी कमरों में बैठ कर मुकाबले की रणनीति ही बनाते रहते हैं लेकिन उसे अमल में कब लाया जायेगा ये उन्हें भी पता नहीं है।
हैरत की बात है कि दंतेवाड़ा की खबर के बाद सेना की मदद का प्रस्ताव रखा गया था और सेना ने नकसली प्रभावित क्षेत्रों मे उन इलाकों को चिन्हित किया था जहां से नक्सली आग बरसाने का काम करते हैं। लेकिन तब विरोधियों ने ये कह कर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि इससे आम लोगों को बेहद परेशानी होगी, अब ये तो वो ही जाने कि क्या अभी आम जनता परेशान नहीं हैं। फिलहाल जनता ने अपना फैसला सुना दिया है कि नक्सलियों के मुकाबले के लिए अब उसे इंडियन फोर्स की जरूरत है। देखना ये होगा कि सरकार पं. बंगाल की त्रास्दी के बाद मुआवजे का ऐलान करके चुप हो जाती है या फिर वो जनता के फैसले का सम्मान करती है।













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