पेयजल सुरक्षा पर समग्र दृष्टकिोण अपनाना होगा : जोशी
यहां हैबीटेट सेन्टर में जल अल्प उपलब्धता एवं दूषित जल क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि पेयजल सुरक्षा मुद्दे पर एकल तौर पर नहीं बल्कि समग्र रूप से विचार करना होगा।
डा. जोशी ने चीन, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल, दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिध मंडल और जलापूर्ति क्षेत्र के राष्ट्रीय और व्यावसायिक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षाजल संग्रहण के जरिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायतों को यह अधिकार प्राप्त होना चाहिए कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के जल उपलब्धता के बारे में तय करें कि कृषि, उद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों में जल का क्या उपयोग होगा।
पेयजल आपूर्ति विभाग सचिव राजवन्त संधू ने कहा कि देश में बरसात हर जगह समान रूप से नहीं होती जिसके कारण पेयजल की बेहद कमी हो जाती है। उन्होंने कहा कि चूंकि जल के उपयोग से चलने वाले उद्योग और स्थानीय निकाय पानी की रीसाइक्िंलग नहीं करते, न उसे दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाते हैं और उसे प्रदूषित करते हैं, इसलिए जल भंडारण में कमी हो रही है।
बांध बनाने के मुद्दे पर संधू ने कहा कि बांध के निर्माण से उत्पन्न लोगों के पुर्नवास की समस्या उठने के कारण उनका विरोध होता है, इसिलए यह जरूरी है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत स्थानीय स्तर पर जल भंडारण विकसित किए जाएं।
कार्यशाला में भारत और विदेश के लगभग 20 गणमान्य विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। इनमें विश्व बैंक के कंट्री निदेशक रॉबर्टो जागा, योजना आयोग के सदस्य मिहिर शाह, विश्व बैंक के डब्लूएसपी-एसए क्रस्टिोफर जुआन कोस्टेन, इजरायली वॉटर एसोसिएशन के पूर्व वॉटर कमिश्नर शिमोन तल, डा. गौरी शंकर घोष, ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य के गोल्डकोस्ट वॉटर के सर्विस डिलेवरी प्रबंधक डारेन हेमैन, विट्स यूनिवर्सटिी के विजिटिंग एडजंक्ट प्रोफेसर डा. माइक मुलर, सीएसई की सुनीता नारायण, बीजिंग के विश्व बैंक कार्यालय के डा. पॉल क्रिस, विश्व बैंक के वरिष्ठ जल संसाधन विशेषज्ञ संजय पाहुजा, जल संसाधन सलाहकार डा. के.एस. मणि, तरुण भारत संघ के राजेन्द्र सिंह, अन्ना हजारे और हाईवायर बाजार के पोपट राव पवार शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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