मैंगलोर विमान हादसा : फ्लाइट डाटा रिकार्डर बरामद (लीड-1)
नागरिक उड्डयन प्रवर्तन निदेशालय और स्थानीय पुलिस के दल ने एफडीआर को खोज निकाला। आग और धुएं के कारण यह काला पड़ गया था, जबकि सामान्य तौर इसका रंग नारंगी होता है।
अधिकारियों ने उस स्थान का पता नहीं बताया जहां एफडीआर मिला है। इसे विश्लेषण के लिए दिल्ली भेजा जाएगा, जिससे पिछले एक दशक की सबसे बड़ी विमान दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी। विमान दुर्घटना में 158 लोगों की मौत हुई थी।
खोजी दल ने देर रविवार कॉकपिट वॉयस रिकार्डर (सीवीआर) और डिजिटल फ्लाइट डाटा एक्वीजिशन यूनिट (डीएफडीएयू) को बरामद किया था।
विशेषज्ञों के अनुसार दो उपकरणों-डिजिटल कॉकपिट वायस रिकार्डर और फ्लाइट डाटा रिकार्डर को आम बोलचाल में ब्लैक बॉक्स कहा जाता है। इनसे दुर्घटना के कारणों की जांच में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।
कॉकपिट वायस रिकार्डर, कॉकपिट में हुई किसी भी बातचीत और हवाई यातायात नियंत्रक के साथ हुई वार्ता को रिकार्ड करता है, जिससे किसी भी दुर्घटना के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलता है। फ्लाइट डाटा रिकार्डर में विमान की उड़ान का विवरण मसलन उसकी गति, इंजन की स्थिति, हवा का दबाव, ऊंचाई, राडार की स्थिति दर्ज होती है जो दुर्घटना की जांच के लिए महत्वपूर्ण है।
डीजीसीए के बयान के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त विमान का सीवीए आग से प्रभावित हुआ है लेकिन इससे आवश्यक जानकारी हासिल होने की उम्मीद है।
डीएफडीएयू उड़ान संबंधी आंकड़ें दर्ज करने वाले उपकरण डिजिटल फ्लाइट डाटा रिकार्डर के समान ही होता है।
एक जांच अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि सीवीआर और फ्लाइट डाटा का विश्लेषण अगले पखवाड़े तक होगा।
पुलिस ने बताया कि 22 शवों की पहचान अब भी नहीं हो पाई है और उनकी पहचान के लिए डीएनए परीक्षण किए जाएंगे। हैदराबाद के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने डीएनए परीक्षण के लिए परिवार के सदस्यों के आवश्यक नमूने लिए हैं। परीक्षणों के परिणाम एक हफ्ते में आने की उम्मीद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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