मैंगलोर विमान हादसा : डीएनए परीक्षण से पहचाने जाएंगे शव

बंगलौर से वरिष्ठ पत्रकार ख़ालिद कर्नाटकी ने बीबीसी को बताया कि 158 शवों को निकाल लिया गया है लेकिन अब तक केवल 70 शवों की पहचान हो पाई है. उन्होंने बताया कि रविवार को हैदराबाद से टीम पहुँच गई है और उसने डीएनए से पहचान का काम शुरू कर दिया है लेकिन इस काम में एक दो दिन का समय लग सकता है.
ख़ालिद कर्नाटकी बताया कि इतनी बड़ी संख्या में शवों को रखने में समस्या पेश आ रही है इसलिए उन्हें आसपास के अस्पताओं में रखने की व्यवस्था की गई है. इस विमान हादसे में चालक दल के छह सदस्यों समेत 166 लोग सवार थे. इनमें से 158 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन आठ लोग ज़िंदा बच गए हैं. इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है.
ब्लैक बॉक्स की तलाश
इधर दुर्घटनाग्रस्त विमान का ब्लैक बॉक्स नहीं मिला पाया है. दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में ब्लैक बॉक्स की अहम भूमिका रहती है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने शनिवार को घटनास्थल का दौरा किया था और विमान हादसे की नैतिक ज़िम्मेदारी ली थी.
प्रफुल्ल पटेल ने दिल्ली लौटकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की और उन्हें स्थिति से अवगत कराया. पत्रकारों से बातचीत में प्रफुल्ल पटेल ने घटना की नैतिक ज़िम्मेदारी ली थी और कहा था, "मैं मैंगलोर विमान हादसे से काफ़ी दुखी हूँ. मुझे इतनी बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने का मुझे भारी दुख है." मैंगलोर में हुए विमान हादसे की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं.
अमरीका स्थित नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ़्टी बोर्ड के अधिकारी और बोइंग की टीम विमान हादसे की जाँच में मदद के लिए भारत पहुँच रही है. प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि शुरुआती जाँच से यही लगता है कि रनवे को लेकर कोई समस्या नहीं थी. उन्होंने बताया कि सर्बिया के ज़ेड ग्लूसिका इस विमान के पायलट थे और काफ़ी अनुभवी थे. उनके सह पायलट एचएस अहलूवालिया को भी अच्छा अनुभव था. उन्होंने स्पष्ट किया कि चार साल पुराना मैंगलोर रनवे पूरी तरह सुरक्षित है.












Click it and Unblock the Notifications