मैंगलोर विमान हादसा : 159 की मौत, ब्लैक बाक्स का सुराग नहीं (राउंडअप)

मैंगलोर, 22 मई (आईएएनएस)। दुबई से मैंगलोर आया एयर इंडिया एक्सप्रेस का बोइंग 737-800 विमान शनिवार सुबह तकरीबन छह बजे मैंगलोर में ऊंचाई पर स्थित बाज्पे हवाई अड्डे पर उतरते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया और टुकड़े-टुकड़े होकर गहरी घाटी में गिर गया। इस हादसे में 159 लोगों की मौत हो गई है और केवल सात लोग जीवित बच पाए।

जंगली गहरी घाटियों से घिरा बाज्पे हवाईअड्डा लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए अति मुश्किल हवाईअड्डों में से गिना जाता है, क्योंकि यहां रनवे के बाद पर्याप्त सुरक्षा क्षेत्र का अभाव है।

नागरिक उड्डयन सचिव एम. एम. नांबियार ने कहा कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर जिसे ब्लैक बाक्स भी कहा जाता है का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने मृतकों के परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन देते हुए कहा, "इस मामले की एक विस्तृत जांच होगी।"

विमान हादसे में जीवित बचे कृष्णन का कहना है कि उन्होंने विमान को धू-धूकर जलते देखा और उसमें मौजूद मुसाफिरों की चीखें सुनाई दे रही थी। वह विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बनी दरार से कूदकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।

कृष्णन ने बताया, "विमान पेड़ जैसी किसी चीज से टकराया। मैंने ऊपर देखा तो सूर्य की रोशनी मेरी आंखों में पड़ी और मैंने टूट चुके विमान में एक दरार देखी।" उन्होंने बताया , "मैं चार अन्य लोगों के साथ, जो मेरे साथ कूदे थे, दूर भाग गया।"

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक विमान ने जब उड़ान भरी तो उसमें 166 लोग सवार थे। इनमें 137 वयस्क, 19 बच्चे, चार नवजात और छह चालक दल के सदस्य सवार थे।

दो दिन पहले तक यहां तेज बारिश हो रही थी लेकिन विमान के उतरते वक्त दृश्यता छह किलोमीटर तक थी, हवा शांत थी और बारिश नहीं हो रही थी। विमान को हालांकि जहां (टच डाउन जोन पर) उतरना था, वह उससे कुछ आगे उतरा और रनवे से आगे निकल गया तथा एक गड्ढे में जा गिरा। माना जा रहा है कि रनवे पर उतरने के दौरान ही विमान का अगला पहिया फट गया था हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान अब तक जारी नहीं किया गया है।

एयर इंडिया के निदेशक अनूप श्रीवास्तव ने दुर्घटना के कारणों के बारे में विस्तार से बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है।

एएआई द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इस रनवे की लम्बाई 2450 मीटर है और यहां 90 मीटर रनवे सुरक्षा क्षेत्र (रनवे इंड सेफ्टी एरिया) है। विमानचालक की ओर से किसी भी तरह की परेशानी होने की कोई सूचना नहीं दी गई थी। विमान का मुख्य पायलट सर्बियाई मूल का ब्रिटिश नागरिक था।

इस बीच बोइंग कंपनी ने विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों की जांच में तकनीकी सहयोग देने के लिए एक दल को भेजने की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुर्घटना में मारे गए लोगों के प्रति दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये तथा घायलों के लिए 50,000 रुपये मुआवजे का आदेश दिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "प्रधानमंत्री ने हादसे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रफुल्ल पटेल से बात की और उनसे दुर्घटनास्थल पर चल रहे राहत व बचाव कार्य के बारे में जानकारी ली।"

इस दुखद हादसे को देखते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने के उपलक्ष्य पर प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित अन्य नेताओं ने इस विमान हादसे पर गहरा शोक जताया है। हादसे के मद्देनजर केरल में दो दिनों का शोक घोषित किया गया है। इस हादसे में मारे गए अधिकांश लोग केरल के थे।

रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने कहा कि विमान हादसे के बाद जारी राहत कार्यो की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सीधे निगरानी कर रहे हैं।

हादसे में उमर फारूक नाम का एक शख्स जैसे-तैसे दुर्घटनाग्रस्त विमान से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा।

फारूक के सिर और चेहरे का अधिकांश हिस्सा जल गया है। उन्होंने यह भी बताया कि चालक दल ने उतरने से पूर्व यात्रियों को आगाह भी नहीं किया था। यहां तक कि उन्हें सीट बेल्ट बांधने की सूचना तक नहीं दी गई थी।

भाजपा संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "सुबह-सुबह हुआ यह विमान हादसा चौंकाने वाला है। मैंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा से बात की है और उनसे आग्रह किया है कि वह इस हादसे के पीड़ितों तक राहत व पुनर्वास कार्य पहुंचाने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें।"

वर्ष 1962 से लेकर यह देश में 11वीं बड़ी दुर्घटना है। इससे पहले 17 जुलाई 2000 को पटना हवाई अड्डे पर हुई दुर्घटना में 60 लोगों की मौत हो गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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