'कसाब को फांसी देने के लिए जल्लाद बनने की ख्वाहिश' (लीड-1)
समस्तीपुर जिले के पटौरी प्रखंड के दो अलग-अलग गांवों में रहने वाले सरोज कुमार और अरविंद उर्फ डोमन ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और महाराष्ट्र सरकार को इस संबंध में पत्र भेजा था। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के छांबा जिले के सलोनी गांव के 36 वर्षीय गिंदो राम ने ऐसी ही इच्छा व्यक्त की है।
राम ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति को पत्र लिखा था कि उन्हें कसाब को फांसी के फंदे में लटकाने का काम मिलना चाहिए। एक निजी कंपनी में चालक का काम करने वाले राम ने कहा, "मैं सेना में भर्ती होना चाहता था लेकिन मेरा सपना पूरा न हो सका। मेरी इच्छा है कि देश के लिए कुछ करूं। कसाब को फांसी पर लटका कर मैं यह काम करना चाहता हूं।"
उधर, बिहार निवासी सरोज ने आईएएनएस से कहा, "मैंने समाचार पत्र में पढ़ा कि कसाब को फांसी के फंदे में लटकाने के लिए कोई जल्लाद नहीं है। इसी वजह से मैंने पेशकश की कि सरकार मुझे इस काम को अंजाम तक पहुंचाने का मौका दे।"
डोमन के भी यही विचार हैं। उन्होंने कहा, "मैंने पेशकश की है कि कसाब को फांसी में लटकाने का काम मुझे मिले।"
सरोज और डोमन ने कहा कि देश का अंतिम आधिकारिक जल्लाद नाटा मल्लिक मूल रूप से पटौरी प्रखंड का ही था। कोलकाता की एक छात्रा के साथ बलात्कार और फिर उसकी हत्या के मामले में दोषी धनंजय चटर्जी को अगस्त, 2004 में नाटा ने ही फांसी के फंदे में लटकाया था।
सरोज और डोमन ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें जल्लाद के कार्यो का अनुभव नहीं है लेकिन इसके बावजूद वे कसाब को फांसी के फंदे में लटका सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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