परमाणु दायित्व विधेयक लोकसभा में पेश, विपक्ष का बहिर्गमन (राउंडअप)
नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। सरकार ने संसद के बजट सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को विवादास्पद असैन्य परमाणु दायित्व विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया। मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामदलों के सदस्यों ने इस विधेयक को 'असंवैधानिक और गैरकानूनी' बताते हुए सदन का बहिष्कार किया।
वर्ष 2008 में हुए भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए परमाणु दायित्व विधेयक 2010 को पारित कराना अनिवार्य है। अब इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा। सरकार इसे मानसून सत्र में विचार के लिए लाने पर आशान्वित है।
संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा, "विधेयक संबंधित स्थाई समिति के पास जाएगा जो इस पर अगले दो महीनों में विचार करेगा।"
बजट सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा इस विधेयक को लोकसभा में रखने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और वाम दलों ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
बीजू जनता दल (बीजद) तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने भी इस विधेयक का विरोध किया।
समाजवादी पार्टी (सपा),बहुजन समाज पार्टी (बसपा)और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने हालांकि विरोध में हिस्सा नहीं लिया।
भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने सदन में कहा, "यह संविधान के अनुच्छेदों के विपरीत है। यह गैर कानूनी और असंवैधानिक है।" पूर्व विदेश मंत्री सिन्हा ने सरकार पर अमेरिकी दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री से इस विधेयक में संशोधन के बारे में कहा था लेकिन सरकार इसे मौजूदा स्वरूप में ही पेश करने के लिए 'अटल' है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेव आचार्य ने कहा कि विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
विधेयक केउद्देश्यों और कारणों के बारे में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, "परमाणु ऊर्जा पैदा करने वाले बहुत से देशों के अपने कानून हैं और उनमें से कुछ किसी न किसी व्यवस्था में शामिल हैं।"
उन्होंने कहा कि भारत अभी तक किसी भी परमाणु दायित्व समझौते में शामिल नहीं है।
उन्होंने कहा, "भारतीय परमाणु उद्योग, परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत घरेलू ढांचे के संदर्भ में विकसित किया गया है। परमाणु दुर्घटना होने पर इस कानून में परमाणु दायित्व या हर्जाने के बारे में कोई प्रावधान नहीं है और परमाणु दुर्घटना की सूरत में होने वाले किसी भी नुकसान के लिए किसी भी कानून में परमाणु दायित्व की बात नहीं कही गई है।"
इससे पहले मार्च में संसद के बजट सत्र के पहले चरण में विपक्ष के रवैये को देखते हुए सरकार ने इस विधेयक को पेश करना टाल दिया था।
इस कानून का पारित होना उन गिने-चुने आखिरी कदमों में शुमार है जिन्हें पूरा किया जाना भारत-अमेरिका के बीच संपन्न असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को लागू करने के लिए अनिवार्य है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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