ब्रिटेन में त्रिशंकु संसद, कंजरवेटिव सबसे बड़ी पार्टी (लीड-4)
अब तक कुल 637 सीटों के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। इनमें 301 सीटें कंजरवेटिव के खाते में गई हैं। दूसरी ओर लेबर पार्टी 255 सीटें जीत चुकी है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के 54 उम्मीदवार अब तक निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। अन्य के खाते में 27 सीटें गई हैं।
लेबर पार्टी के 326 के जादुई आंकड़े से काफी दूर होने के बावजदू प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि ब्रिटेन को एक मजबूत, स्थाई और सैद्धांतिक सरकार देना उनकी जिम्मेदारी है।
चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी कंजरवेटिव के नेता डेविड कैमरन ने कहा कि जनमत ब्राउन के खिलाफ है और जनता बदलाव चाहती है।
लेबर पार्टी के मुख्य रणनीतिकार पीटर मंडेलसन ने कहा कि वे सरकार बनाना चाहेंगे, क्योंकि नियम यह है कि त्रिशंकु संसद की स्थिति में सबसे बड़ी पार्टी को नहीं बल्कि सत्ताधारी पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिलता है।
यद्यपि, लेबर पार्टी कोई मौका देना नहीं चाहती। उसने इन चुनावों में किंग मेकर की भूमिका में उभरे लिबरल डेमोक्रेटिक से संपर्क स्थापित किया है। लेबर के रणनीतिकारों ने लिबरल डेमोक्रेटिक के नेता निक क्लेग से संपर्क साधा है।
ब्रिटेन के अलिखित संविधान के मुताबिक मौजूदा प्रधानमंत्री के पास महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पास सरकार बनाने का दावा पेश करने का अधिकार है।
यद्यपि, परिपाटी ऐसी रही है कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का दावा पेश करने का 'नैतिक' अधिकार है।
निक क्लेग ने कहा कि शनिवार को उनकी पार्टी के सांसदों की बैठक होगी और यह तय किया जाएगा कि उन्हें किस गठबंधन- लेबर या कंजरवेटिव-में शामिल होना चाहिए।
क्लेग ने कहा कि उन्हें जो आशा थी, पार्टी ने वसा प्रदर्शन नहीं किया है।
इन चुनावों में भारतीय मूल के लोगों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। लेबर पार्टी के टिकट पर कम से कम तीन भारतीय मूल के उम्मीदवार विजयी हुए हैं।
कीथ वाज, विरेंद्र शर्मा और मार्श सिंह ने शानदार जीत दर्ज की है जबकि परमजीत ढंडा और मनीष सूद चुनाव हार गए हैं।
ब्रिटेन के 650 सदस्यीय संसद के लिए 4150 उम्मीदवार मैदान में थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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