• search
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    स्तब्ध है फ़ैसल शहज़ाद का गाँव

    By Ankur Sharma
    |
    स्तब्ध है फ़ैसल शहज़ाद का गाँव

    एम इलियास ख़ान

    बीबीसी न्यूज़, पाकिस्तान

    अमरीका में आतंकवाद के मामले में पकड़े गए, पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक फ़ैसल शहज़ाद के, पाकिस्तान में दोनों पारिवारिक घर फ़िलहाल सील कर दिए गए हैं.

    दोनों घर सरहदी सूबे में हैं – एक पेशावर में और एक पैतृक गाँव मोहिब बंदा में जो पेशावर से कोई 30 किलोमीटर दूर है.

    पेशावर में उनके घर के बाहर उमड़े पत्रकार और टीवी चैनलों के लोग कह रहे हैं कि फ़ैसल के घर के लोग वहाँ से चले गए हैं और भीतर केवल कुछ नौकर लोग रह गए हैं. हालाँकि वे ना तो दरवाज़ा खोल रहे हैं ना ही फ़ोन उठा रहे हैं.

    मोहिब बंदा वाले घर पर स्थिति अलग है – वहाँ फ़ैसल शहज़ाद के चचेरे भाई और उनकी पत्नी रहती हैं. वे दरवाज़ा बंद कर काम पर चले जाते हैं.

    ताला देर तक लगा रहता है, ऑफ़िस का समय ख़त्म होने के बाद भी. शायद वहाँ रहनेवाले पत्रकारों और गाँव के तमाशबीनों का सामना नहीं करना चाहते.

    बदलाव

    फ़ैसल से हाल के वर्षों में मुलाक़ात करनेवाले कुछ लोग ऐसा इशारा करते हैं कि फ़ैसल उन्हें कुछ बदले-बदले लगने लगे थे.

    एक बुज़ुर्ग फ़ैज़ अहमद कहते हैं,"वो बड़ा तेज़-तर्रार लड़का था, काफ़ी सक्रिय रहनेवाला. लेकिन तीन साल पहले शादी होने के बाद से वो बदलने लगा. वो पेशावर छोड़ कराची में बसने लगा, उसने दाढ़ी बढ़ा ली, शांत हो गया और अपने-आप को दुनिया से काटने लगा.

    "मुझे लगता है वो निश्चय ही अतिवादियों के संपर्क में आया होगा जिन्होंने इस दशक के मध्य में पाकिस्तानी वायुसेना में पैठ बनानी शुरू कर दी."

    ख़ुद को फ़ैसल का बचपन का दोस्त बतानेवाले नासिर ख़ान बताते हैं कि फ़ैसल ऐसा आदमी नहीं था जिसके बारे में वो सोच सकें कि वो मासूम लोगों को मार सकता है. मगर वो कहते हैं कि उन्होंने भी फ़ैसल में हाल के वर्षों में कुछ बदलाव होते हुए देखा.

    नासिर ख़ान कहते हैं,"उसने कभी भी तालेबान या किसी दूसरे चरमपंथी गुट का नाम नहीं लिया मगर वो मुस्लिमों के प्रति अमरीका की नीति को लेकर लगातार कड़ी आलोचना करने लगा था, जैसे इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान के मामले में अमरीका की नीति पर."

    नासिर कहते हैं कि वे फ़ैसल शहज़ाद से पिछले साल के मध्य में मिले थे जब वो एक शादी में शामिल होने पेशावर आया था.

    नासिर कहते हैं,"मुझे पता है वो पाकिस्तान में काफ़ी समय रहा लेकिन मैंने उसको शादी के बाद नहीं देखा, मुझे पता नहीं वो क्या करता था सिवा इसके कि वो कराची में रहने की जगह अधिकतर समय पेशावर में रहा."

    गाँव

    गाँव के लोग भी अलग-अलग तरह की बातें कह रहे हैं.

    कुछ कहते हैं कि फ़ैसल ने कथित रूप से अमरीका में जो किया उससे गाँव का नाम ख़राब हुआ है.

    वहीं कुछ कहते हैं कि ये सारी बात अविश्वसनीय है, संभवतः ये अमरीका के विरूद्ध पाकिस्तान की साज़िश है.

    इनमें से कई लोगों ने फ़ैसल शहज़ाद को देखा भी नहीं है. कुछ कहते हैं कि उन्होंने एक-दो बार गाँव में फ़ैसल को देखा था.

    फ़ैसल को जाननेवाले लोग तो और भी कम हैं, हालाँकि उनके चचेरे भाई इबरार ख़ान उन्हें कुछ-कुछ जानने का दावा करते हैं.

    इबरार कहते हैं,"फ़ैसल के पिता वायुसेना में थे और अधिकतर समय वे अलग-अलग शहरों में रहे. वहीं फ़ैसल और उनके बड़े भाई आमिर शहज़ाद का जन्म हुआ और उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई. इससे अधिक मुझे नहीं पता."

    मगर वो इस बात पर ज़ोर देते हैं कि फ़ैसल निर्दोष है.

    इबरार कहते हैं,"आप गाँव में किसी से भी बात कर लें और आपको पता चल जाएगा कि उनका ख़ानदान कैसा था."

    अधिकतर गाँववाले मानते हैं कि फ़ैसल शहज़ाद के पिता सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल बहारुल हक़ एक शिक्षित और अच्छे ख़ानदान के व्यक्ति हैं और उनके दोनों बेटे इस अच्छे ख़ानदान का ही अंश हैं.

    कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि फ़ैसल शहज़ाद अंतिम बार पाकिस्तान पिछले साल जुलाई में आए और इस साल फ़रवरी में वहाँ से निकल गए.

    उनके कई रिश्तेदारों के लिए फ़ैसल की गिरफ़्तारी एक चौंकानेवाली ख़बर है.

    उनके एक रिश्तेदार कहते हैं,"ये ख़बर सुनाकर आपने मेरे रोएँ खड़े कर दिए हैं. मैं इसपर विश्वास नहीं कर सकता. वे सब काफी पढ़े लिखे और सभ्य लोग हैं."

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more