फांसी की सज़ा सुन टूट गया कसाब

कसाब ने पिछले डेढ़ साल में जेल के अंदर कई बार बिरयानी की मांग की। रक्षा बंधन पर राखी बंधवाने और रोज सुबह उठकर अखबार पढ़ने की डिमांड वो करता था। यही नहीं अपने बयान से वो कई बार पलटा। उसने यहां तक कहा कि वे हमले से पहले मुंबई में मौजूद था। कभी उसने कहा कि वो पाकिस्तान से आया है, तो कभी कहता कि उसे अपने बारे में भी कुछ पता नहीं। इसी कसाब की सजा से जुड़े मुख्य बिंदुओं पर हम यां प्रकाश डाल रहे हैं-
वर्ष 2008:
26 नवंबर: अजमल आमिर कसाब सहित नौ अन्य आतंकवादियों ने कमांडो कार्रवाई के अंदाज में दक्षिण मुंबई की सात जगहों पर हमला किया।
27 नवंबर: तड़के करीब 1.30 बजे कसाब को एक पुलिसकर्मी ने गिरगांव चौपाटी पर गिरफ्तार किया, उसे नायर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
29 नवंबर: कसाब ने पुलिस को बयान दिया, उसने अपना गुनाह कबूला।
29 नवंबर: हमले वाले जगहों को सुरक्षित घोषित किया गया। नौ आतंकी मारे गए, कसाब एक मात्र जिंदा आतंकी पकड़ा गया।
30 नवंबर: पुलिस ने कसाब का बयान दर्ज किया।
27-28 दिसंबर: पहचान परेड आयोजित।
वर्ष 2009:
13 जनवरी: महाराष्ट्र सरकार ने एम. एल. ताहिलयानी को 26/11 मामले की सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया।
16 जनवरी: कसाब को आर्थर रोड जेल भेजा गया।
5 फरवरी: कसाब के डीएनए नमूने और कुबेर नाव के नमूनों में समानता पाई गई।
20-21 फरवरी: कसाब ने मजिस्ट्रेट आर. वी. सावंत-वागले के सामने अपराध स्वीकारा।
22 फरवरी: 1993 मुंबई धमाकों में वकील रहे उज्जवल निकम 26/11 मामले में विशेष सरकारी वकील नियुक्त।
25 फरवरी: कसाब और दो अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र एस्प्लानेड मेट्रोपालिटन अदालत में दायर।
1 अप्रैल: न्यायालय ने अंजली वागमरे को कसाब का वकील नियुक्त किया।
15 अप्रैल: अंजली वागमरे कसाब के वकील के पद से हटीं।
16 अप्रैल: एस. जी. अब्बास काजमी को कसाब का वकील बनाया गया।
17 अप्रैल: कसाब का कबूलनामा न्यायालय में पेश। कसाब ने झुठलाया।
20 अप्रैल: अभियोजन पक्ष ने कसाब पर 312 आरोप लगाए।
6 मई: कसाब पर 86 आरोप तय, कसाब का आरोपों से इंकार।
8 मई: पहला गवाह पेश, कसाब को पहचाना।
23 जून: हाफिज सईद, जकी-उर- रहमान लखवी समेत 22 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी। भगोड़े घोषित।
25 जून: कसाब को आंत में अल्सर का पता चला।
20 जुलाई: कसाब ने न्यायाधीश ताहिलयानी के सामने अपराध स्वीकार किया।
30 नवंबर: एस. जी. अब्बास काजमी को कसाब के वकील पद से हटाया गया।
1 दिसंबर: के. पी. पवार ने काजमी की जगह ली।
16 दिसंबर: अभियोजन पक्ष ने 26/11 मामला पूर्ण किया।
18 दिसंबर: कसाब सभी आरोपों से मुकरा।
वर्ष 2010:
11 फरवरी: 26/11 मामले में वकील शाहिद आजमी को गोली मारी गई।
23 फरवरी: आखिरी दलीलें 9 मार्च से शुरू करने का फैसला।
31 मार्च: मामले में दलीलें पूर्ण।
6 अप्रैल: महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर. आर. पाटील ने कहा कि 15 महीनों तक 9 आतंकियों की लाशें रखने के बाद उन्हें गुप्त अभियान के तहत दफनाया गया।
3 मई: विशेष न्यायाधीश एम. एल. ताहिलयानी ने हत्या और युद्ध छेड़ने सहित सभी अपराधों में कसाब को दोषी ठहराया। अन्य आरोपियों अंसारी और सबाउद्दीन को बरी किया।
4 मई: अभियोजन पक्ष का सजा को लेकर अदालत में जिरह।
6 मई: विशेष अदालत ने कसाब को फांसी की सजा सुनाई।












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