कसाब समाज के लिए खतरा : न्यायाधीश

मुंबई, 6 मई (आईएएनएस)। सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश एम. एल. ताहिलयानि ने गुरुवार को मुंबई हमले में फैसला सुनाते हुए कहा कि कसाब को फांसी पर लटकाए जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि 26/11 का हमलावर भारत पर हमले के लिए उत्सुक था और उसकी 'नीचता' स्पष्ट थी।

ताहिलयानि ने अपने फैसले में कहा, "कसाब, आपको चार गुनाहों के लिए सजा-ए-मौत दी जाती है-खून, पाकिस्तान में लश्कर मेंबर्स के साथ साजिश, और उससे हुए खून, जंग छेड़ना और दहशतगर्दी। आपको सजा-ए-मौत दी जाती है। आपकी जजमेंट की कॉपी आपके वकील को दे दी जाएगी।"

उन्होंने कहा, "आपके गले से दम निकलने तक फांसी से लटकाया जाएगा।"

कसाब को मृत्युदंड दिए जाने के फैसले के कुछ अंश :

- वह (कसाब) मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ है इसलिए सुधार या पुनर्सुधार से पूरी तरह इंकार कर दिया गया। जिस तरह से उसने अपराध किया था यह संभव नहीं है।

- वह स्वेच्छा से लश्कर-ए-तैयबा के दफ्तर गया और खुद को एक मुजाहिदीन के रूप में पेश किया।

- उसके कुछ सहयोगियों ने बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ दिया लेकिन उसने दूसरा रास्ता चुना। उसे यहां तक कि अपनी मातृभूमि जाने का भी अवसर मिला लेकिन वह नहीं गया।

- बचाव याचिका में कहा गया कि कसाब ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी के दबाव में यह काम किया जिसे स्वीकार नहीं किया गया। उसने (कसाब) खुद लश्कर का दरवाजा खटखटाया और एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा की। वह भारत पर हमला करने के लिए उत्सुक था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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