मद्यपान से प्रभावित होता है मस्तिष्क
साउथेम्पटन विश्वविद्यालय के 'स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज' (यूएसएसबीएस) ने एक मिलीमीटर लंबे सी. एलीगेंस कृमियों पर अल्कोहल निर्भरता और इसके न मिलने पर होने वाले असर का अध्ययन किया था।
इस कृमि और मनुष्य में विकासात्मक दूरी बहुत अधिक होने के बावजूद इसमें मानव जैसी ही अल्कोहल निर्भरता देखी गई। इस कृमि के मस्तिष्क में मात्र 302 तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं।
शोध में पता चला है कि शराब का सेवन बंद करने पर होने वाले विरोध के लक्षणों को अल्कोहल की कम मात्रा देकर दूर किया जा सकता है। यद्यपि इससे अल्कोहल के प्रति निर्भरता बढ़ सकती है।
मानव में शराब का सेवन रोक देने पर उत्तेजना जैसे लक्षण देखे जाते हैं। शोधकर्ताओं ने कृमि का वीडियो तैयार किया था जिसमें देखा गया है कि अल्कोहल न मिलने पर कृमियों में सहज प्रतिक्रिया देखी गई, उनका शरीर बहुत अधिक झुकने लगा था। अल्कोहल युक्त पेय पदार्थो के इस्तेमाल वाले कृमियों में यह व्यवहार बहुत कम देखने को मिलता है।
अध्ययनकर्ता लिंडी होल्डेन-डाई कहती हैं कि शोध से स्पष्ट हुआ है कि कृमियों को एल्कोहल न मिलने पर उनमें इसका असर दिखने लगता है। कृमियों के व्यवहार को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि इसका उनकी तंत्रिका कोशिकाओं पर क्या असर हो रहा है।
यूएसएसबीएस की विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अध्ययन मद्यपान से निपटने की दिशा में एक बेहद प्रभावी प्रायोगिक प्रणाली उपलब्ध कराता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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