कसाब को सजा-ए-मौत पर ट्विटर पर चर्चा

नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। मुंबई पर 26/11 को हुए हमलों के मामले में एक विशेष अदालत द्वारा पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइट ट्विटर पर मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट ने कहा कि अंतत: कसाब मामले का पटाक्षेप हो ही गया।

भट्ट की टिप्पणी है, "अब एक अध्याय समाप्त हो चुका है। आशा है कि कसाब को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देश में इस मामले का पटाक्षेप हो गया।" उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मृत्युदंड प्रभावी होता है।

हॉलीवुड निर्देशक वूडी ऐलन को उद्धत करते हुए भट्ट ने कहा, "जघन्य अपराध मामलों में मौत की सजा ज्यादा प्रभावी होती है। "

पत्रकार बरखा दत्त की टिप्पणी है, "कसाब को सजा-ए-मौत मिलनी ही थी लेकिन क्या समाचार चैनलों को सजा के बारे में दर्शकों से सवाल पूछकर रक्तरंजित वातावारण बनाना चाहिए था?"

आरएस नाम के एक व्यक्ति ने टिप्पणी की है, "आखिरकर कसाब को मौत की सजा मिल ही गई लेकिन क्या मानावाधिकार और तमाम तरह के अधिकारों की बात करने वाले इसे होने देंगे..। याद रखें कि सद्दाम को गुप्त तरीके से फांसी पर लटकाया गया था.।"

शुभम नाम के शख्स ने ट्विटर पर कहा, "चलिए, कसाब को मौत की सजा मिल ही गई। उसे मुंबई में सरेआम फांसी पर लटका देना चाहिए। हमें 26/11 को नहीं भूलना चाहिए.।"

मुंबई हमलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालत के न्यायाधीश एम.एल.ताहिलयानी ने गुरुवार को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने सहित चार मामलों में मौत की सजा सुनाई। उन्होंने फैसला सुनाते हुए कहा, "कसाब को मौत तक फांसी पर लटकाया जाए। यदि कसाब को जीवित छोड़ा जाएगा तो आम आदमी का अदालत से भरोसा उठ जाएगा। उसे जीने का अधिकार नहीं है। मौत की सजा आवश्यक है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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